नेपाल त्रासदी। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तिब्बत सीमा के पास आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक करीब 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 133 भारतीय नागरिकों समेत 1000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई शहरों और गांवों को नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में पुल बह गए हैं, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
नेपाल सरकार के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बाढ़ से करीब 200 अरब नेपाली रुपये के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8.37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। शुरुआती आशंका है कि भूकंप के झटकों से किसी ग्लेशियल झील में हलचल हुई और पानी अचानक बाहर निकलने से बाढ़ की स्थिति बनी। अधिकारियों के अनुसार भोटे कोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से सटे रसुवा और धादिंग जिले गंभीर रूप से प्रभावित हुए।
ऐसे रहा बहाव
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के बाद स्थिति बिगड़ी। रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी के रास्ते त्रिशूली नदी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। देखते ही देखते पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ। बाढ़ का असर इसके बाद नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत कई अन्य जिलों तक पहुंच गया। राजधानी काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर स्थित कई इलाकों में भी बाढ़ और मलबे के कारण हालात बिगड़ गए। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
चलाया जा रहा रेस्क्यू
नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि अचानक आई बाढ़ में अब तक 157 लोगों की जान जा चुकी है। नेपाल सरकार के अनुसार करीब 500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, चीन के एक सरकारी न्यूज चौनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में भी बाढ़ से तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 265 लोग लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के अलग-अलग हिस्सों से करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से लगभग 30 लोगों का इलाज काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में किया जा रहा है। राहत दलों की ओर से लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
दिखी भयावहता
नेपाल से सामने आए कई वीडियो बाढ़ की भयावहता दिखा रहे हैं। तस्वीरों और वीडियो में कीचड़, पत्थरों और मलबे से भरा पानी बेहद तेज गति से सीमावर्ती इलाकों में बहता नजर आ रहा है। पानी का बहाव इतना ज्यादा था कि लोग अपने घरों और वाहनों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। एक वीडियो में चार मंजिला इमारत तेज पानी के बहाव में कुछ ही पलों में ढहती और बहती नजर आती है। दूसरे वीडियो में पानी के दबाव के कारण एक बड़ा पुल बीच से टूट जाता दिखाई देता है। कई अन्य जगहों पर भी पुल पानी के साथ बहते नजर आए। एक वीडियो में कीचड़ से भरा तेज बहाव एक पुल को अपनी चपेट में लेता है और करीब 30 सेकंड के भीतर उसे पूरी तरह बहा ले जाता है।
भारत ने पहुचाई मदद
नेपाल में बिगड़े हालात के बीच भारत ने भी मदद पहुंचाने की पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर उन्हें हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इसके बाद भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजे जाने की जानकारी सामने आई। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता और उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
दूतावास ने बताया कि प्रभावित भारतीय नागरिक $977 985 131 6807 और $977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। दोनों देशों के बीच समन्वय के जरिए बचाव और राहत अभियान को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं चीन में स्थित भारतीय दूतावास ने भी मदद के लिए 0086 185 1428 4905 नंबर जारी किया है। इस नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। इस पर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने क्या कहा आइए जानते हैं…ख्ठलजम-7,
बड़ी संख्या में भारतीय लापता
अधिकारियों के अनुसार नेपाल में लापता करीब 1000 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय यानी एनआरआई शामिल हैं। इनमें कम से कम 50 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। ईशा फाउंडेशन ने भी अपने 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने बताया कि आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फाउंडेशन के 495 सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं। दूसरी तरफ नेपाल सरकार के मुताबिक संबंधित आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश और केरल समेत कई अन्य राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। राज्यों को आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके नागरिक भी शामिल हो सकते हैं।
लापता लोगों में भारतीयों और एनआरआई के अलावा अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत दो दर्जन से ज्यादा देशों के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग स्थानों पर करीब 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल हैं। बचाव और खोज अभियान को तेज करने के लिए नेपाली सेना ने 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं।
रसुवा और उससे जुड़े निचले क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ से सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री सुनील लामसाल के अनुसार शुरुआती आकलन में नुकसान करीब 200 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच सकता है। यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के बराबर बताई जा रही है। मंत्री के मुताबिक बाढ़ से सबसे ज्यादा असर सड़कों, पुलों और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है। नुकसान का आकलन अभी शुरुआती चरण में है और प्रभावित इलाकों का सर्वे पूरा होने के बाद वास्तविक आंकड़ा और बढ़ सकता है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) ने भी जलविद्युत क्षेत्र को हुए नुकसान की जानकारी दी है। संगठन के अनुसार नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा पांच निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
अब भी खतरा
बाढ़ के बाद हालात सामान्य नहीं हुए हैं और कई इलाकों में खतरा अब भी बना हुआ है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को चेतावनी दी। विभाग के अनुसार चीन से मिली जानकारी में पता चला है कि नदी के बहाव को रोकने वाली जगह पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला है। ऐसे में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदियों के आसपास नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। एनडीआरआरएमए ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भोटे कोशी और त्रिशूली क्षेत्र में स्थिति अभी संवेदनशील है। लोगों को नदी से पर्याप्त दूरी बनाए रखने और अगली सूचना तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। वहीं सरकार प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने की कोशिश कर रही है। हालात पर नेपाल के साथ भारत और चीन की एजेंसियां भी नजर बनाए हुए हैं।

