Dev Diwali 2025 Significance Muhurat: क्यों त्रिपुरासुर के वध के बाद बनारस में जलाए गए लाखों दिये

Dev Diwali 2025 Significance Muhurat

Dev Diwali 2025 Significance Muhurat: देव दिवाली भारत का एक ऐसा अनूठा पर्व है जब काशी के गंगा तट पर असंख्य दीप एक साथ जलाए जाते हैं। लाखों दीप जब एक साथ जगमगाते हैं तो ऐसा लगता है कि स्वर्ग खुद धरती पर उतर आया है। परंतु क्या आप जानते हैं कि देव दीपावली की जड़ें एक प्राचीन युद्ध में छिपी हुई है। जब स्वयं महादेव ने धर्म की स्थापना हेतु त्रिपुरासुर का वध किया था। जी हां, त्रिपुरासुर कोई साधारण राक्षस नहीं था उसके पास विशेष शक्तियां थी जिसका वध करने के लिए स्वयं महादेव को आना पड़ा।

Dev Diwali 2025 Significance Muhurat
Dev Diwali 2025 Significance Muhurat

त्रिपुरासुर असल में तीन असुर भाई तारकाक्ष, कमलाक्ष और विधुनमाली का सामूहिक नाम था। यह तीनों मयासुर के पुत्र थे। उनके पिता ने उन्हें विभिन्न मायावी शक्तियां दी थी और देवताओं तथा ब्रह्म के आशीर्वाद से इन तीनों भाइयों को तीन उड़ते हुए नगर मिले थे। एक स्वर्ण नगर, एक रजत नगर और एक लौह नगर। यह तीनों नगर लगातार गतिशील रहते थे। इसीलिए इन्हें त्रिपुरासुर कहा जाता था अर्थात तीन विशिष्ट नगरों के स्वामी।

त्रिपुरासुर के वध के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश को आना पड़ा एक साथ

शास्त्रों में वर्णित है कि त्रिपुरासुर को ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि जब तक उनके तीनों नगर एक साथ ना हो तब तक कोई बाण उन्हें नष्ट न कर सके और क्योंकि तीनों नगर लगातार गतिशील रहते थे और एक साथ नहीं आते थे तो इसीलिए कोई भी इन तीनों को नहीं मार सकता था। जब त्रिपुरासुर का अत्याचार चरम पर पहुंचा तब सभी देवी देवता भगवान शिव की शरण में गए और उन्होंने महादेव से निवेदन किया कि वह त्रिपुरासुर का अंत करें।

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त्रिपुरासुर का वध काफी कठिन था इसीलिए ब्रह्मा जी ने पृथ्वी रूपी एक विशाल रथ बनाया, सूर्य और चंद्रमा इसके पहिये बने, खुद ब्रह्मा इस रथ के सारथी बने, कैलाश पर्वत को धनुष बनाया गया और विष्णु जी बाण बने, भगवान शिव ने धनुष बाण उठाया और हजारों वर्षों बाद जब तीनों नगर एक साथ आए तब शिवजी ने एक ही बाण छोड़कर तीनों नगरों को भस्म कर दिया। जब तीनों नगर भस्म हुए तब त्रिपुरासुर का अंत हो गया। यह दिन पूर्णिमा का था इसलिए इस दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा मनाई जाती है।

त्रिपुरासुर का अंत, देवताओं की दीवाली

कहा जाता है कि जब त्रिपुरासुर का अंत हुआ तब सभी देवी देवताओं ने प्रसन्न होकर भगवान महादेव की काशी नगरी में दीप प्रज्वलित किया और गंगा तट पर भगवान शिव की प्रार्थना की। इसीलिए इस दिन को देव दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन काशी में लाखों दिए एक साथ जलाए जाते हैं और शिव की आराधना की जाती है।

वर्ष 2025 में त्रिपुरारी पूर्णिमा 5 अक्टूबर 2025 को पड़ने वाली है। इस दिन बनारस में लाखों दिए एक साथ जलाए जाने वाले हैं। बनारस के 84 घाटों पर इस दिन दीप प्रज्वलित किया जाता है। वे लोग जो किसी कारणवश बनारस नहीं जा सकते वे 5 नवंबर 2025 बुधवार के दिन अपने घर पर ही महादेव का स्मरण करते हुए दीप जला सकते हैं और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन दीप प्रज्वलित करने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल शाम 5:15 से 7:50 तक बताया जा रहा है।

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