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दिल्ली की 1531 कच्ची कॉलोनियों के नियमितीकरण को मंजूरी मिली। पीएम-उदय योजना के तहत 50 लाख लोगों को मिलेगा मालिकाना हक। जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी नियम।

Aerial view of unauthorized residential colonies in Delhi being regularized under PM-UDAY scheme.Aerial view of unauthorized residential colonies in Delhi being regularized under PM-UDAY scheme.

Delhi 1531 Colonies Regularization News 2026

दिल्ली के लाखों परिवारों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने राजधानी की 1531 कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को घोषणा की कि पीएम-उदय (PM-UDAY) योजना के तहत इन कॉलोनियों को “जहां है, जैसा है” (As Is, Where Is) के आधार पर कानूनी मान्यता दी जाएगी। इस फैसले से दिल्ली के करीब 50 लाख निवासियों को उनके घरों का मालिकाना हक मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

नियमितीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस बार प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है। पहले कच्ची कॉलोनियों के नियमितीकरण में लेआउट प्लान (Layout Plan) की मंजूरी सबसे बड़ी बाधा बनती थी। अब नई व्यवस्था के तहत 1531 कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने के लिए किसी भी लेआउट प्लान की आवश्यकता नहीं होगी।

यह निर्णय विशेष रूप से उन लोगों के लिए मददगार साबित होगा जो तकनीकी जटिलताओं के कारण वर्षों से अपनी संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों का इंतजार कर रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन कॉलोनियों के भीतर मौजूद सभी प्लॉट्स और इमारतों को अब ‘आवासीय’ (Residential) श्रेणी में माना जाएगा।

पीएम-उदय योजना: अब तक की प्रगति और चुनौतियां

साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम-उदय योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक और संपत्ति पर लोन लेने की सुविधा देना था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 40,000 कन्वेंस डीड और ऑथराइजेशन स्लिप जारी की जा चुकी हैं।

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हालांकि, तकनीकी खामियों और लेआउट प्लान की अनिवार्य शर्तों की वजह से इस प्रक्रिया की रफ्तार काफी धीमी थी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और शहरी विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप की सराहना करते हुए कहा कि अब बाधाओं को दूर कर लिया गया है। दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 511 को तत्काल प्रभाव से नियमित किया जा रहा है।

आवेदन और सर्वे के लिए सख्त समयसीमा

सरकार ने इस योजना को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए राजस्व विभाग को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब एडीएम (ADM) स्तर के अधिकारी सिंगल पॉइंट अप्रूवल अथॉरिटी के रूप में कार्य करेंगे। पूरी प्रक्रिया के लिए एक ‘फास्ट-ट्रैक’ टाइमलाइन निर्धारित की गई है:

संयुक्त सर्वे का काम राजस्व अधिकारियों की देखरेख में होगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी और पात्र निवासियों को समय पर उनके हक के कागज मिल सकेंगे।

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प्रतिबंधित क्षेत्रों वाली कॉलोनियों को राहत नहीं

भले ही 1531 कच्ची कॉलोनियों को नियमित किया जा रहा है, लेकिन कुल 1,731 में से कुछ कॉलोनियां अभी भी इस दायरे से बाहर रहेंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो कॉलोनियां रिज एरिया (Ridge Area), ओजोन-सेंसिटिव जोन या संरक्षित स्मारकों के बेहद करीब स्थित हैं, उन्हें फिलहाल इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। इन विशिष्ट श्रेणियों को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में एमसीडी (MCD) द्वारा ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे।

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छोटे व्यापारियों को बड़ी सौगात

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस कदम को दिल्ली के आर्थिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे व्यापारियों को भी सुरक्षा प्रदान करती है। नए प्रावधानों के अनुसार, इन कॉलोनियों में स्थित 20 वर्ग मीटर तक की छोटी दुकानों को भी कुछ शर्तों के साथ नियमित कर दिया जाएगा। इससे उन हजारों दुकानदारों को राहत मिलेगी जो अब तक कानूनी डर के साये में अपना व्यापार कर रहे थे।

24 अप्रैल से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

इस योजना का लाभ उठाने के लिए निवासियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नियमितीकरण के लिए आवेदन की प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। आवेदक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे, जिसके बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर अधिकारी साइट विजिट और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।

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निष्कर्ष

दिल्ली के शहरी विकास के इतिहास में यह एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। “जहां है, जैसा है” के सिद्धांत को अपनाने से न केवल सरकारी कागजी कार्रवाई कम होगी, बल्कि उन 10 लाख परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं और कानूनी सुरक्षा के अभाव में जी रहे थे।

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