क्रूड ऑयल फिर 100 डॉलर पार! ट्रंप का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आया नया फरमान

Crude Oil Prices: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति 28 फरवरी 2026 से बनी जी हां आप कह सकते हैं कि युद्ध की शुरुआत इस दिन हुई थी. गौरतलब है कि इस टेंशन की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें कुछ ही समय में लगभग दोगुनी से भी अधिक हो गई. वैश्विक स्तर पर अगर बात करें तो पूरी दुनिया को ऐसा लग रहा था कि यह तनाव जल्द ही समाप्त हो जाएगा. लेकिन दो सप्ताह के युद्ध विराम के बाद भी तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है. बढ़ते तनाव के कारण आज यानी 13 अप्रैल 2026, दिन सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 8% की तेजी रिकॉर्ड हुई.

ट्रंप के बयान का असर

आपको बता दें कि, मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव के कारण आज कच्चे तेल की कीमत लगभग 8% की तेजी के साथ 104.208 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं ब्रेंट की कीमत 6.56% की तेजी के बाद 101.491 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है.

महत्वपूर्ण बात बताएं तो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के असफल होने के बाद ही यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि सप्ताह के पहले दिन बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिलेगी. गौरतलब है कि, ईरान ने अमेरिका की शर्तों को नहीं माना. इसके बाद अब गुस्से में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से उन जहाजों के गुजरने पर रोक लगा दी है जो ईरान को टोल का भुगतान कर रहे हैं.

आपको एक और बात बताते चलें कि ईरान हमेशा से यह कहता आ रहा है कि जब तक यह अमेरिका और इजरायल हमले बंद नहीं करेंगे तब तक वह इस मार्ग को ओपन नहीं करेंगे. अमेरिका द्वारा उन बारूद की सुरंग को खोजा जा रहा है और नष्ट करने की तैयारी की जा रही है जिन्हें ईरान ने बिछाया है.

युद्धविराम से 16℅ गिरी थीं कीमतें

आपको बता दें कि, जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्ध विराम का ऐलान हुआ था तब तेल की कीमतों में 16% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई थी.

तेल और गैस के दामों में होगी बढ़ोतरी?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में तेल और गैस की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. उनका कहना है कि ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने और पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है.

युद्ध की वजह से विश्व में बढ़ रहा ऊर्जा संकट

गौरतलब है कि, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जब से इस युद्ध की शुरुआत हुई है तब से दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद होने से तेल और गैस के जहाज की सप्लाई रुकी हुई है. आपको यह भी बता दें कि, इस मार्ग से दुनिया की तेल और गैस की जरूरत का लगभग पांचवा हिस्सा गुजरता है. वहीं भारत इसी मार्ग से लगभग 80% ऊर्जा का आयात करता है. इसलिए यदि यह मार्ग जल्द ही शुरू नहीं होता है तो तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण दुनिया के सामने नया आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है.

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