CJI पर जूता फेंकने वाले वकील पर अवमानना का केस! AG की मंजूरी मिली

Contempt case filed against Rakesh Kishore: सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई (CJI BR Gavai) पर जूता फेंकने की घटना को लेकर वकील राकेश किशोर कुमार (Rakesh Kishore Kumar) के खिलाफ अवमानना का केस (Contempt Case Rakesh Kishore) चलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणि (AG R Venkataramani) ने केस की मंजूरी दे दी, जिसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई। लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि जब कई जरूरी मामले पेंडिंग हैं, तो इस पर समय बर्बाद क्यों करें? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Tushar Mehta) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह (SCBA President Vikas Singh) ने जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) और जस्टिस जयमाला बागची (Justice Jaimala Bagchi) की बेंच से सुनवाई की मांग की।

6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में CJI गवई की बेंच सुनवाई कर रही थी, जब वकील राकेश किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की। यह 16 सितंबर 2025 को खजुराहो के वामन मंदिर में विष्णु मूर्ति बहाली की PIL पर CJI के बयान – “भगवान से कहो कि वे खुद अपना सिर जोड़ लें” – से उपजा आक्रोश था। राकेश ने इसे “सनातन धर्म का अपमान” बताया। घटना के दौरान CJI गवई ने शांत रहते हुए कहा, “इससे परेशान न हों, मैं भी नहीं हूं। ये चीजें मुझे प्रभावित नहीं करतीं। बहस जारी रखें।” राकेश को तुरंत गिरफ्तार किया गया, लेकिन CJI की शिकायत न होने से रिहा कर दिया गया। SCBA ने उनकी मेंबरशिप रद्द कर दी, और BCI ने सस्पेंड कर दिया। राकेश ने कहा, “मुझे अफसोस नहीं। यह सनातन का अपमान था।

अवमानना केस की मंजूरी: AG का फैसला

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने अवमानना का केस चलाने की मंजूरी दे दी, जो सुप्रीम कोर्ट को सूचित कर दी गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच से सुनवाई की अपील की। विकास सिंह ने कहा, “घटना का महिमामंडन बंद होना चाहिए। सोशल मीडिया पर उन्माद फैल रहा है, जो कोर्ट की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहा है।” उन्होंने सोशल मीडिया पर अपमानजनक कमेंट्स रोकने के लिए ‘जॉन डो’ ऑर्डर की मांग की।

कोर्ट बोला समय बर्बाद क्यों करें?

सुनवाई के दौरान बेंच ने केस को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाए। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “जब अदालत में कई केस पेंडिंग हैं, इस केस पर 5 मिनट खर्च करना कितना सही होगा?” जस्टिस बागची ने जोड़ा, “हमारा व्यवहार और हम खुद को कैसे संभालते हैं, उससे हमें सम्मान मिलता है। CJI ने इसे एक गैर-जिम्मेदार नागरिक का कृत्य बताकर दरकिनार कर दिया है। आपको इस बात पर विचार करना होगा कि क्या उस घटना को उठाना जरूरी है जिसका हमने निपटारा कर दिया है।” जस्टिस बागची ने चेतावनी दी, “हम पैसा कमाने वाले उद्यम बन गए हैं।” बेंच ने सोशल मीडिया ऑर्डर पर भी सतर्कता बरती, कहा कि यह बहस को बढ़ा सकता है। कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ, लेकिन केस पर विचार जारी है।

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