नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इससे एक दिन पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों से बढ़ा विवाद
पूरा विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर को प्रकाशित जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को लेकर यह सवाल उठाया कि उन्हें उनकी जानकारी या सहमति के बिना जारी किया गया। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form 6 में बदलाव और मतदाता आंकड़ों से जुड़े कुछ मामलों से बताया गया है।
कांग्रेस ने देशभर में किया प्रदर्शन
रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। देहरादून में प्रदर्शनकारियों के बैरिकेडिंग पर चढ़ने की खबर सामने आई। वहीं दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और प्रदर्शन को देखते हुए बैरिकेडिंग की गई। असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कुछ नेताओं को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।
कांग्रेस का आरोप- चुनाव आयोग में पारदर्शिता नहीं
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों में पारदर्शिता की कमी है। पार्टी ने दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग की ओर से भी कुछ मामलों पर सफाई दी जा रही है। आयोग ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कुछ कार्यक्रमों में बदलाव का चुनाव आयोग के अंदर चल रहे विवाद से कोई संबंध नहीं है। आयोग ने इसके पीछे कार्यक्रम स्थल, अधिकारियों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थागत कारणों का हवाला दिया।
SIR को लेकर पहले से चल रहा विवाद
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की यह खबर ऐसे समय सामने आई है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार से जून 2025 में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम बाहर हुए हैं। आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति अलग-अलग मौकों पर स्पष्ट की गई है। ऐसे में अब विवाद का केंद्र SIR के साथ-साथ चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति भी बन गई है।

