Silver Crash Alert: चांदी में तगड़ी गिरावट का डर? विशेषज्ञों ने जताई आशंका

Silver Rate Crash Alert: पिछले एक साल में चांदी का जो हाल रहा है वो किसी से छुपा नहीं रहा है जी हां चांदी ने एक साल में निवेशकों को चौंकाने वाली तेजी दिखाई है. गौरतलब है कि, जिस चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छूकर बाजार में उत्साह भर दिया था, उसी में हालिया कारोबारी सत्रों के दौरान अचानक आई कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. आपको बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में दिखे तेज उतार-चढ़ाव के बाद ये सवाल उठने लगा है कि क्या आगे और चांदी की चमक अब फीकी पड़ने वाली है.

ग्लोबल और घरेलू मार्केट में बढ़ी हलचल

गौर करने वाली बात यह है कि, हाल ही के कारोबारी सत्रों में एशियाई बाजार खुलते ही चांदी पर दबाव साफ नजर आया. अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर चांदी के भाव में तेज गिरावट देखने को मिली और भाव कुछ ही समय में 63 डॉलर प्रति औंस के आसपास फिसल गए. घरेलू स्तर पर MCX सिल्वर भी कमजोर खुली और दिन की शुरुआत में ही भारी गिरावट दर्ज की गई.

हालांकि ये बात भी थी कि, चांदी के निचले स्तरों पर खरीदारी आने से कीमतों में आंशिक सुधार हुआ, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट इसे स्थायी तेजी नहीं मान रहे. उनका मानना है कि इस तरह की रिकवरी अक्सर अस्थायी होती है और बड़े ट्रेंड की दिशा बदलने का संकेत नहीं देती.

Dollar की मजबूती और भू-राजनीतिक संकेत

SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट्स की बात मानें तो उनके अनुसार, चांदी के भाव पर दबाव के पीछे दो अहम वजहें हैं, पहली, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी के संकेत, और दूसरी, अमेरिकी डॉलर की मजबूती. जैसे ही न्यूक्लियर बातचीत से जुड़ी खबरें सामने आईं, डॉलर मजबूत हुआ और सेफ-हेवन एसेट्स जैसे सोना-चांदी से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी. हालांकि डॉलर में हल्की प्रॉफिट बुकिंग के चलते कीमतों में थोड़ी रिकवरी दिखी, लेकिन डॉलर इंडेक्स का मजबूत बने रहना आगे भी दबाव बनाए रख सकता है.

इंडस्ट्रियल डिमांड दे रहा चेतावनी

अब सबसे अहम बात पर आते हैं जो कि एक्सपर्ट बताते हैं कि, ऊंची कीमतों की वजह से इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी चांदी की मांग पर असर पड़ा है. सोलर और बैटरी टेक्नोलॉजी में चांदी की जगह कॉपर के इस्तेमाल पर जोर बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड तेज होता है, तो लंबी अवधि में चांदी की डिमांड कमजोर पड़ सकती है. बता दें कि इतिहास भी चांदी के निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत देता है.

इतिहास भी दे रहा चेतावनी

गौरतलब है कि, 1980 और 2011 में तेज उछाल के बाद भारी गिरावट देखने को मिली थी. मौजूदा हालात में भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी अपने ऊंचे स्तरों से 75 से 80℅ तक फिसल सकती है और आने वाले समय में कीमतें काफी नीचे के स्तर पर स्थिर हो सकती हैं. बहरहाल अब देखना ये होगा कि क्या चांदी में आगे नरमी आयेगी या फिर उछाल इसी तरह जारी रहेगा.

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