संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सोमवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। पार्टी ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर संसद मार्च का ऐलान किया था, जिसके बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही भारी भीड़ जुटने लगी।
दोपहर तक प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। हालात बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। बाद में पुलिस ने जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के कई हिस्सों को खाली करा दिया और CJP का मंच भी हटवा दिया।
इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तख्तापलट को लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में हुए बड़े आंदोलनों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत में भी ऐसी स्थिति बन सकती है।
अभिजीत दिपके ने पीएम मोदी का इस्तीफा मांगा
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने हाल ही में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा कि पहले उनकी मांग केवल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस्तीफा मांग रहे हैं।
कहा जा रहा है कि इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा, खासकर Gen-Z शामिल हुए। यही वजह है कि कुछ लोग इसे पड़ोसी देशों में युवाओं द्वारा किए गए बड़े आंदोलनों से जोड़कर देख रहे हैं।
भारत में तख्तापलट मुश्किल क्यों?
भारत में किसी भी सरकार को अचानक और गैर-कानूनी तरीके से हटाना बेहद मुश्किल माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश का मजबूत लोकतंत्र और संविधान है।
हर पांच साल में चुनाव होते हैं, जहां जनता अपने वोट से सरकार बदल सकती है। अगर लोगों को किसी सरकार से नाराजगी है, तो उसका संवैधानिक रास्ता चुनाव होता है, न कि हिंसक आंदोलन।
सेना राजनीति से दूर रहती है
कई देशों में तख्तापलट के पीछे सेना की भूमिका रही है। लेकिन भारत में सेना पूरी तरह संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जवाबदेह है। आजादी के बाद से भारतीय सेना ने खुद को राजनीति से दूर रखा है और उसका काम केवल देश की सुरक्षा करना है।
सुप्रीम कोर्ट और संविधान की ताकत
अगर कोई भी समूह गैर-संवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश करे, तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। भारतीय न्यायपालिका को संविधान का रक्षक माना जाता है और वह कानून के खिलाफ किसी भी कदम पर रोक लगा सकती है।
सत्ता का बंटवारा भी बड़ी वजह
भारत में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का साफ बंटवारा है। संसद सरकार से सवाल पूछ सकती है और अदालतें गलत फैसलों पर रोक लगा सकती हैं। यही संतुलन लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
इसके अलावा भारत एक संघीय देश है, जहां राज्यों की अपनी सरकारें हैं। इसलिए केवल दिल्ली में किसी एक आंदोलन से पूरे देश की सत्ता व्यवस्था को बदलना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता।
संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन हिंसा या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं देता। यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसी तख्तापलट की स्थिति बनना बेहद कठिन है।

