राजस्थान। राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में शुक्रवार को एक सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी अपनी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत गांव के सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया। सीजेपी का आरोप है कि उनकी टीम के साथ मारपीट की गई और वाहनों में तोड़फोड़ की गई, जबकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि गांव के किसी व्यक्ति ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला नहीं किया। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि पार्टी की टीम पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले से स्थिति की जानकारी थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। रांका के अनुसार, उनकी टीम के सदस्यों के साथ मारपीट हुई, महिलाओं पर भी कथित तौर पर पत्थर फेंके गए और कई वाहनों व मोबाइल फोन को नुकसान पहुंचाया गया।
मुकदमा दर्ज करने की मांग
सीजेपी ने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम पहले से सुनियोजित था और इसके पीछे राजनीतिक दबाव था। रांका ने कथित हमले में शामिल लोगों की 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं, सीजेपी कार्यकर्ता संजू ने भी मारपीट का आरोप लगाया। उनका कहना है कि टीम स्कूल की वास्तविक स्थिति देखने और उसके सुधार की मांग को लेकर पहुंची थी। उनके मुताबिक, पार्टी के कुछ सदस्य एक साल पहले भी इस स्कूल की स्थिति देख चुके थे, जब कथित तौर पर स्कूल भैंसों के बाड़े में संचालित हो रहा था।
गांव वालों ने सीजेपी के आरोपों को नकारा
गांव के लोगों ने सीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल की व्यवस्था और नई इमारत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, काफी प्रयासों के बाद स्कूल भवन के लिए राशि स्वीकृत कराई गई है और गांव के लोगों ने स्कूल के लिए अपनी जमीन तक उपलब्ध कराई है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि स्कूल की पुरानी इमारत जर्जर होने के बाद उसे कुछ समय के लिए पास के गांव के स्कूल में मर्ज कर दिया गया था। इसका गांव वालों ने विरोध किया और स्कूल को दोबारा गांव में संचालित कराने के लिए संघर्ष किया। फिलहाल, जमीन और भवन से जुड़ी परिस्थितियों के कारण स्कूल की व्यवस्था अस्थायी रूप से एक कमरे में की गई है, जहां जमीन का उपयोग करने वाला व्यक्ति अपना चारा भी रखता है।
गांव वालों को स्कूल जाने का सता रहा डर
गांव वालों का कहना है कि उन्हें इस बात की चिंता है कि ‘तबेले में चल रहे स्कूल’ जैसी खबरें सामने आने के बाद कहीं सरकार नई इमारत बनने तक स्कूल को फिर से दूसरे गांव में मर्ज न कर दे। इसी वजह से ग्रामीण एकजुट होकर स्कूल को गांव में ही संचालित रखने की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि सीजेपी कार्यकर्ताओं को गांव के किसी व्यक्ति ने नहीं मारा। इस मामले में बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा ने सीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी का कोई विशेष महत्व नहीं है। वहीं, राजस्थान सरकार के मंत्री अविनाश गहलोत ने आरोप लगाया कि सीजेपी स्कूल की मरम्मत के बजाय इलाके में अराजकता फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग जागरूक हैं और किसी भी राजनीतिक गतिविधि के नाम पर अव्यवस्था फैलाने को स्वीकार नहीं करेंगे।
जारी है आरोप-प्रत्यारोप
फिलहाल, इस पूरे मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सीजेपी जहां इसे राजनीतिक विरोध और सुनियोजित हमले का मामला बता रही है, वहीं ग्रामीण इसे बाहरी लोगों द्वारा गांव के लंबे समय से चल रहे संघर्ष को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रहे हैं।

