CJI गवई अटैक केस: राकेश किशोर की बार मेंबरशिप खत्म, बेंगलुरु में FIR दर्ज!

FIR Against Advocate Rakesh Kishore: सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने गुरुवार को उनकी मेंबरशिप तुरंत समाप्त कर दी, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। बेंगलुरु में ऑल इंडिया एडवोकेट्स एसोसिएशन ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 और 133 के तहत मामला दर्ज हुआ। यह कार्रवाई 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई घटना के तुरंत बाद की गई, जहां 71 वर्षीय राकेश ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की और “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” के नारे लगाए। SCBA ने कहा, “वकील का व्यवहार पेशेवर नैतिकता, शिष्टाचार और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है

यह घटना 16 सितंबर को खजुराहो (मध्य प्रदेश) के ज्वारी (वामन) मंदिर में क्षतिग्रस्त भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची मूर्ति की बहाली की PIL सुनवाई से जुड़ी है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मूर्ति मुगल आक्रमणों में टूटी थी, और अदालत से पूजा अधिकारों की रक्षा की मांग की। CJI गवई की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “जाओ, भगवान से खुद करने को कहो।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां इसे “सनातन धर्म का अपमान” बताया गया। 18 सितंबर को CJI ने स्पष्ट किया, “मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखाया गया। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।” बेंच के सदस्य जस्टिस के.वी. चंद्रन ने सोशल मीडिया को “एंटी-सोशल मीडिया” कहा। याचिकाकर्ता के वकील संजय नुली ने कहा कि CJI पर सोशल मीडिया के झूठे बयान गलत हैं।

राकेश किशोर का बयान: “अफसोस नहीं,

7 अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए राकेश ने कहा, “मैंने जो किया उस पर कोई अफसोस नहीं है। नशे में नहीं था। जो हुआ, मुझे उसका अफसोस नहीं, किसी का डर भी नहीं है।” उन्होंने CJI पर पक्षपात का आरोप लगाया, “यही चीफ जस्टिस बहुत सारे धर्मों के खिलाफ, दूसरे समुदाय के लोगों के खिलाफ केस आता है तो बड़े-बड़े स्टेप लेते हैं।” हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण वाले 3 साल पुराने स्टे का उदाहरण देते हुए कहा कि CJI ने दूसरे समुदाय के पक्ष में स्टे दिया। राकेश 2011 से SCBA में रजिस्टर्ड थे।

राकेश किशोर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई (Actions Taken Against Rakesh Kishore)

  • SCBA का फैसला: गुरुवार को मेंबरशिप तुरंत समाप्त। एसोसिएशन ने कहा कि यह कोर्ट की गरिमा का उल्लंघन है।
  • BCI का आदेश: चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने सस्पेंशन का आदेश जारी किया, “यह वकीलों के आचरण और नियमों का उल्लंघन है।” 15 दिनों में शो-कॉज नोटिस मिलेगा। सस्पेंशन के दौरान राकेश कहीं प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
  • पुलिस एक्शन: घटना के बाद 3 घंटे पूछताछ हुई, लेकिन CJI ने शिकायत नहीं की, इसलिए रिहा। बेंगलुरु में ऑल इंडिया एडवोकेट्स एसोसिएशन की FIR में BNS धारा 132 (सार्वजनिक सेवक पर हमला) और 133 (आपराधिक बल) लगीं। CJI गवई ने शिकायत करने से इनकार कर दिया।

राकेश की मेंबरशिप खत्म होने से वे कानूनी प्रैक्टिस से बाहर हैं। BCI की सुनवाई में सजा हो सकती है – कांटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट के तहत 6 महीने जेल या ₹2000 जुर्माना। बेंगलुरु FIR से क्रिमिनल केस चलेगा। यह घटना सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर बहस छेड़ सकती है।

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