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इंदौर के जहरीले पानी पर मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन, ननि कमिश्नर को नोटिस, हटाए गए इंजीनियर

Workers inspecting contaminated water pipeline site with Madhya Pradesh CM in official meeting frame

इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर अवार्ड प्राप्त इंदौर इन दिनों चर्चा में है, लेकिन इस बार चर्चा यहां की कोई उपलब्धि नही बल्कि प्रशासन की गलत व्यवस्था को लेकर हो रही है, क्योकि दूषित पानी से इंदौर के तकरीबन 15 लोगो के मौत की खबरें आ रही है, हांलाकि सरकार की ओर से कोर्ट को जो रिर्पोट दी गई है उसमें 4 लोगो के मौत की जानकारी आ रही है।

सीएम ने लिया एक्शन

इंदौर के दूषित पानी मामले में अब मुख्यमंत्री मोहन यादव एक्शन ले रहे है। उनके निर्देश पर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है। वहीं, इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लिया गया है।

अपर मुख्य सचिव ने की जांच

दरअसल अपर मुख्य सचिव संजय दुबे गुरुवार को इंदौर पहुंचे थे। उन्होंने स्थल निरिक्षण करके दूषित पानी सप्लाई लाइन को देखने के बाद नगर निगम जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की क्लास लिए। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के स्थल निरिक्षण और बैठक के बाद सरकार का एक्शन सामने आ गया। माना जा रहा है कि दूषित जल सप्लाई मामले में अभी और कार्रवाई हो सकती है।

6 जनवरी को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौत मामला हाई कोर्ट में पहुचा है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को संज्ञान में लेकर सरकार से जबाब मांगा। कोर्ट इस मामले में 6 जनवरी को सुनवाई करेगा। तो वही इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।

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