मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में चलाई तलवार, गैर का भव्य स्वरूप, ऐसी है महाकाल नगरी की परंपरा

उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन में रंगपंचमी उत्सव की धूंम है। खास बात यह है कि इस उत्सव में स्वयं सीएम मोहन यादव शामिल है और ध्वजा का पूजन, शस्त्रों पूजा-अर्चना के साथ ही शस्त्र संचालन कर अनोखा प्रदर्शन किया गया। जिसमें स्वयं सीएम यादव ने तलवार बाजी का जबरदस्त प्रदर्शन किए है। जिसे देखकर उपस्थित लोग दंग रह गए।

गुलाल-रंग से नहाएगा उज्जैन

उज्जैन में रंगपंचमी के अवसर पर भव्य गेर निकल रही है। जिसमें स्वयं सीएम मोहन यादव शामिल हो रहे है। यह गेर महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हो रही है। जिसमें शिव परिवार की झांकियां और बैंड आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इस गेर में लगभग 25 क्विंटल हर्बल गुलाल का उपयोग किया जा रहा। झांकियां, ताशा-ढोल, नृत्य दल और बैंड पार्टियां इस आयोजन को भव्य रूप दे रही है। इंदौर का प्रसिद्ध बैंड भी अपनी प्रस्तुति दे रहा है। पुलिस बल के साथ 14 फायर ब्रिगेड वाहन भी तैनात रहेंगे।

क्या है उज्जैन की रंग पंचमी पर गैर परंपरा

उज्जैन में रंग पंचमी पर पारंपरिक गेर (जल समारोह) (या गेर परंपरा) एक प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत महाकाल मंदिर से होती है। इस दौरान शहर में भगवा ध्वज, अखाड़ों के शस्त्र प्रदर्शन, डीजे और पानी की बौछारों के साथ धूमधाम से जुलूस निकाला जाता है। यह सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह परंपरा होली के पांचवें दिन भगवान कृष्ण और राधा के रंगोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जिसे देवताओं की होली भी कहते हैं।

उज्जैन की रंग पंचमी गेर परंपरा

शुरुआत- रंगपंचमी की शुरुआत सुबह महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को केसरयुक्त जल चढ़ाकर की जाती है।
गैर का स्वरूप- शहर में विभिन्न क्षेत्रों से शोभायात्रा (गैर) निकलती है, जिसमें डीजे पर देशभक्ति गीतों के साथ लोग गुलाल और पानी की बौछारों का आनंद लेते हैं।
शस्त्र और ध्वजा- इस परंपरा में अखाड़ों के शस्त्रों का पूजन और प्रदर्शन किया जाता है, जो शौर्य का प्रतीक माना जाता है।
ऐतिहासिकता- यह सदियों पुरानी परंपरा है जो रंगपंचमी से लेकर गुड़ी पड़वा तक चलती है।

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