Chandra Grahan 2026 : क्या होली पर लगेगा ग्रहण? जानिए कल कितने बजे से लगेगा चंद्र ग्रहण

Chandra Grahan 2026 Sutak Kaal : आज, 2 मार्च को होलिका दहन है और 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। लेकिन इस बार 3 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ये साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है, जो  भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए भारत में सूतक काल और अन्य परंपरागत नियमों का पालन किया जाएगा। जानिए 3 मार्च को होने वाले इस चंद्र ग्रहण का सूतक कब शुरू और खत्म होगा।

3 मार्च 2026 को कब होगा चंद्र ग्रहण?

भारतीय समय के अनुसार, 3 मार्च, मंगलवार को साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण दोपहर 03:23 बजे शुरू होकर शाम 06:47 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे शिलांग, नागालैंड और असम में सबसे पहले नजर आएगा। धीरे-धीरे यह पूरे देश में दिखाई देगा।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण का सूतक काल

शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस लिहाज से, 3 मार्च को होने वाले इस ग्रहण का सूतक सुबह 06:23 बजे से शुरू होकर, ग्रहण समाप्त होने तक यानी शाम 06:47 बजे तक रहेगा। सूतक के दौरान कई कार्यों पर पाबंदी रहती है।

सूतक का समय

  • सूतक प्रारंभ- सुबह 09 बजकर 39 मिनट से
  • सूतक समापन- शाम 06 बजकर 46 मिनट तक

ग्रहण समय

  • चंद्र ग्रहण की शुरुआत- दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण- शाम 05 बजकर 04 मिनट पर
  • चंद्र ग्रहण का समापन- शाम 06 बजकर 46 मिनट पर

भारत में सबसे पहले कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण पूरे भारत में देखा जाएगा, लेकिन इसकी शुरुआत पूर्वोत्तर राज्यों से होगी। नागालैंड में यह ग्रहण सबसे पहले शाम 05:17 बजे से दिखना शुरू होगा, जो 06:46 बजे समाप्त होगा। नागालैंड में इसकी अवधि लगभग 1 घंटा 29 मिनट रहेगी। वहीं, मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में यह ग्रहण महज 5 से 10 मिनट के लिए ही देखे जाने का अवसर मिलेगा।

सूतक काल में क्या करें 

  • सूतक काल में पूजा-पाठ या देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें।
  • सूतक काल में शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान बाल, नाखून या दाढ़ी बनवाने से भी बचना चाहिए।
  • सूतक काल में खाना पकाना या भोजन करना भी वर्जित है।
  • ग्रहण के बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें।
  • इसके बाद भक्ति भाव से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • पूजा के बाद आर्थिक स्थिति अनुसार अन्न और धन का दान करें।

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