Chanakya Niti For Friendship: चाणक्य जिन्हें हम कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जानते हैं जो हमारे प्राचीन भारत के एक जाने-माने राजनीतिज्ञ ,अर्थशास्त्री और दार्शनिक भी थे। उन्होंने अपने जीवन में कई सारे पहलुओं पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं,जिनको लेकर उन्होंने चाणक्य नीति (chanakya niti)नाम की किताब की भी रचना की है। इस किताब में जीवन से जुड़े कुछ ऐसे गहन सूत्रों के बारे में बताया गया है जिससे व्यक्ति जीवन के हर कदम पर सफलता हासिल कर सकता है। चाणक्य द्वारा लिखी गई इस किताब में सच्चे मित्र की पहचान (true friend) और उसके गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है।चाणक्य की इस नीति को अपनाकर व्यक्ति गलत व्यक्ति से मित्रता करने से खुद को बचा सकता है।

मित्रता करने से पहले व्यक्ति को कैसे पहचानें?
जी हां, मित्रता का बंधन ऐसा बंधन होता है जो हमें जीवन के हर मोड़ पर हर बाधा से बचाता है। कहा जाता है कि सच्चे मित्र नसीब वालों को भी मिलते हैं परंतु ऐसा नहीं है सच्चे मित्र की पहचान करना भी आवश्यक होता है।वरना सच्चे मित्र के चक्कर में हम गलत लोगों से मित्रता कर लेते हैं और जिसकी वजह से जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित हो जाता है।आज के इस लेख में हम आपको सच्चे मित्र की कुछ विशेषताओं के बारे में बताएंगे जिसके माध्यम से आप अपने जीवन में सच्चे मित्र का चयन कर सकते हैं(how to choose good friends).
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सच्चे मित्र की पहचान पर चाणक्य के विचार (qualities of true friend)
संकट में साथ निभाने वाला व्यक्ति: चाणक्य ने बताया है कि हमेशा वह मित्र सच्चा साबित होता है जो मुसीबत के समय आपका साथ नहीं छोड़ता बल्कि आपके साथ डटकर खड़ा होता है।
आर्थिक सहायता के लिए तत्पर: सच्चा मित्र हर प्रकार की सहायता करने में तत्पर होता है, खासकर जब आप वित्तीय संकट में होते हैं तो सच्चा मित्र बिना किसी स्वार्थ के आपकी मदद करता है।
जटिल बीमारी में साथ ना छोड़ना: बीमार व्यक्ति का साथ तो उसके परिवार वाले भी नहीं देते परंतु सच्चा मित्र अपने बीमार दोस्त का ख्याल जरूर रखता है।
गुप्त बातों को गुप्त रखने वाला: सच्चे मित्र का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण होता है बातों को गुप्त रखना ,सच्चा मित्र आपकी गुप्त बातों को दूसरों के सामने उजागर नहीं करता।
चाणक्य के अनुसार मित्रता करने से पहले कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
चाणक्य के अनुसार हमेशा मित्रता करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
- मित्र कभी भी विपरीत स्वभाव वाला ना हो
- मित्र अपने से बड़े स्तर और निम्न स्तर का ना हो
- ऐसे मित्र से भी दूर रहे जो दूसरों की अनुपस्थिति में उनकी बुराई आपसे करता हो।