Chaitra Navratri Ashtmi 27 March 2026 : नवमी को करें मन सिद्धिदात्री का पूजन व जानें-कन्या भोज व पारण की विधि-चैत्र नवरात्रि का समापन नवमी तिथि पर अत्यंत ही दिव्य और फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में यह दिन 27 मार्च को है, जब नवरात्रि की नवमी, मां सिद्धिदात्री की पूजा और भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव-राम नवमी-का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है और मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कृपा भी प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस पावन दिन की विस्तृत पूजा विधि, कन्या पूजन का महत्व और व्रत पारण का सही समय। 27 मार्च 2026, चैत्र नवरात्रि नवमी को मां सिद्धिदात्री पूजा का विशेष संयोग राम नवमी भी पड़ रही है जो अपने आप में बेहद अद्भुत है लेकिन इसके लिए पूरा लेख पढ़ना आवश्यक है तो आइए जानें कन्या पूजन, हलवा-पूरी भोग की महिमा और पारण का शुभ समय और पूजा विधि।
Navami Puja Vidhi-नवमी पूजा की विस्तृत विधि
नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इन्हें सभी प्रकार की सिद्धियों (अष्ट सिद्धियों) को प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इनकी कृपा से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- पूजा सामग्री-हलवा, पूरी, चना, नारियल, नवरस युक्त भोजन, लाल चुनरी, कपूर, लौंग, दुर्गा सप्तशती की पुस्तक।
पूजा विधि-सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (बैंगनी या गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं) धारण करें। इसके बाद माता का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा अर्पित करें। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और कपूर व लौंग से आरती करना अत्यंत फलदायी बताया गया है।
Ram Navami Significance-राम नवमी का महत्व और विशेष पाठ
27 मार्च 2026 को नवमी तिथि के साथ ही राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। यह वह दिन है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने धरती पर जन्म लिया था।
- इस दिन भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
- रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
- भगवान राम को मौसमी फल, पंचामृत और भोग लगाने की परंपरा है।
Kanya Pujan Vidhi-कन्या पूजन (कंजका)-
नवरात्रि की साधना का पूर्ण फल
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इसे ‘कंजका’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन 9 कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेने से नवरात्रि की साधना सार्थक होती है।
कंजका की वितरित विधि-
- घर में 9 कन्याओं और एक बटुक (लड़का) को आमंत्रित करें।
- उनके पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं।
- उन्हें हलवा, पूरी, चना और नारियल का भोजन कराएं।
- भोजन के बाद उन्हें लाल चुनरी, दक्षिणा (भेंट) और उपहार देकर आशीर्वाद लें।
Parana Timing and Method-व्रत पारण का समय और विधि
नौ दिनों का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण (व्रत खोलने) का समय निर्धारित है। ध्यान रखें कि पारण तभी किया जाता है जब नवमी तिथि समाप्त हो चुकी हो या निर्धारित मुहूर्त के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। इस तरह पारण का समय-27 मार्च 2026 को सुबह 10:08 बजे के बाद माना गया है। जबकि वैकल्पिक समय में भी पारण कर सकते हैं यदि इस समय पारण संभव न हो तो,दशमी तिथि (28 मार्च) को सुबह स्नान-ध्यान के बाद पारण करना उचित व शुभ-फलदायी होगा।
जिसमें सर्वप्रथम हवन और कन्या पूजन संपन्न करें, माता से आज्ञा लें, फिर ग्रहण करें।
Important Precautions-चैत्र नवरात्री में ध्यान रखने योग्य बातें
इस दिन आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है अतः निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है जिनमें-
- सात्विकता-पूरे दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक वस्तुओं (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) से दूर रहें।
- मानसिक पवित्रता-पूजा के समय मन को शांत रखें और ध्यान में माता का ध्यान करें।
- नियम-कन्याओं को माता का रूप मानकर उनका सत्कार करें। उनके साथ किसी भी प्रकार का अनादर न करें।
निष्कर्ष-चैत्र नवरात्रि की नवमी, मां सिद्धिदात्री की आराधना और राम नवमी का संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ है। यह दिन साधक को सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों ही सिद्धियों को प्रदान करने वाला होता है। विधि-विधान से कन्या पूजन और श्रीरामचरित का स्मरण कर, सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस पावन अवसर पर मां सिद्धिदात्री और प्रभु श्रीराम की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

