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Central Mine Planning IPO में अंतिम दिन तक सिर्फ 28% सब्सक्रिप्शन..

Central Mine Planning IPO

Central Mine Planning IPO

Central Mine Planning IPO: आईपीओ बाजार में सस्ती होने के बीच सेंट्रल मन प्लैनिंग एंड डिज़ाइन इंस्टिट्यूट का आईपीओ अंतिम दिन तक सिर्फ 28% तक ही सब्सक्राइब हो पाया था। यह स्थिति बुक बिल्डिंग के आखिरी दिन तक बनी देखी जिसमें QIB और रिटेल निवेशक की आंशिक भागीदारी दिख रही थी जबकि कुल मांग अपेक्षा से ही कमजोर है।

IPO सब्सक्रिप्शन का क्या है प्रदर्शन

स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार इस आईपीओ को कुल मिलाकर 0.28 गुना यानी 28% तक का सब्सक्रिप्शन मिला है। QIB (Qualified Institutional Buyers) कैटेगरी में अपेक्षा अनुसार बेहतर रुचि देखी गई है जिससे रिटेल निवेशक ने भी इसमें सीमित भागीदारी दिखाइ है।NII (Non-Institutional Investors) से मांग काफी कमजोर दिख रही है हालांकि यह आंकड़े ऐसे संकेत देते हैं कि निवेश करने वाले लोगों ने इस इश्यू को लेकर अपना एक सतर्क रुख अपनाया है।

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GMP और बाजार का क्या है संकेत

ग्रे मार्केट में इस आईपीओ का प्रदर्शन उत्साहजनक नहीं देखा जा रहा है। ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग जीरो रुपए से ₹1 के आसपास दिख रहा है यानी लिस्टिंग पर किसी बड़े प्रीमियम की उम्मीद नहीं पता चल रही है। बाजार विश्लेषक के अनुसार जीएमपी का फ्लैट रहना या दिखता है कि बाजार में इस इश्यू को लेकर कोई मजबूत शॉर्ट टर्म ट्रिगर नहीं है।

कमजोर मांग के क्या है प्रमुख कारण

सेंट्रल माइन प्लानिंग IPO कमजोर मांग होने के कुछ प्रमुख कारण है पहला ofs स्ट्रक्चर का प्रभाव, यह पूरा इशू ऑफर फॉर सेल पर आधारित है इसमें कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा कंपनी ने अपने ऑफिशियल बयान बताया कि यह विनिवेश की प्रक्रिया का हिस्सा है। दूसरा वैल्यूएशन पर सवाल मार्केट विश्लेषण को के अनुसार पीएसयू कंपनी के आईपीओ में अक्सर वैल्यूएशन को लेकर निवेशक सतर्क रहते हैं।

CMPDI के मामले में भी यही रुख में देखने को मिल रहा है। तीसरा बाजार की मौजूदा स्थिति हाल ही के महीना में कई आईपीओ की कमजोरी लिस्टिंग निवेश करने वाले लोगों के विश्वास को प्रभावित किए हैं। जिससे नई इश्यू पर दबाव बना हुआ है।

निवेशकों पर क्या है असर और सेक्टर की क्या है तुलना

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंसल्टेंसी सेक्टर की कंपनी की तुलना में CMPDI का प्रदर्शन फिलहाल एवरेज दिख रहा है। इस सेक्टर में अन्य कंपनियों ने बेहतर सब्सक्रिप्शन दर्ज किए हैं इससे सीएमपीडीआई के प्रति निवेशक की सीमित रुचि दिखती है। हालांकि कोल इंडिया की सब्सिडरी होने के कारण कंपनी के पास स्थिर बिजनेस मॉडल और सरकारी समर्थन का लाभ मिला है।

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आगे का आउटलुक क्या है?

निवेश करने वाले विश्लेषक के अनुसार लिस्टिंग प्रदर्शन काफी हद तक बाजार की समग्र स्थिति और इंस्टीट्यूशन निवेशकों के अंतिम भागीदारी पर निर्भर करता है लॉन्ग टर्म के दृष्टिकोण से कंपनी की स्थिरता एक पॉजिटिव पहलू हो सकती है लेकिन शॉर्ट टर्म की सीमित लिस्टिंग गेम की संभावना जताई जा सकती है। यह खबर केवल आपको जानकारी देने के उद्देश्य से इसको निवेश की सलाह ना समझे।

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