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CBSE की ‘ब्लंडर मिस्टेक’ से मचा बवाल: छात्र वेदांत को बताया गया पाकिस्तानी, आखिर में बोर्ड ने मानी गलती

CBSE (Central Board of Secondary Education) की मूल्यांकन प्रक्रिया (Evaluation Process) पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 12वीं बोर्ड परीक्षा (CBSE Class 12 Result 2026) में कम नंबर मिलने की शिकायत करने वाले छात्र वेदांत श्रीवास्तव (Vedant Shrivastava) को सोशल मीडिया पर ट्रोल्स ने “पाकिस्तानी”, “एंटी नेशनल” और “कॉकरोच” तक कह दिया। लेकिन पूरे विवाद के बाद आखिरकार CBSE को अपनी बड़ी गलती सार्वजनिक रूप से स्वीकार करनी पड़ी।

मामला सिर्फ एक छात्र के कम नंबरों का नहीं रहा, बल्कि इसने देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्थाओं में से एक की मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला?

CBSE ने हाल ही में 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था। रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने कम नंबर मिलने की शिकायतें कीं। उन्हीं में से एक छात्र वेदांत श्रीवास्तव था, जिसे फिजिक्स (Physics) में उम्मीद से बेहद कम अंक मिले थे।

वेदांत को भरोसा था कि उसने परीक्षा अच्छी दी है और उसके नंबर गलत तरीके से काटे गए हैं। इसके बाद उसने CBSE की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया (Re-Evaluation Process) के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) की स्कैन कॉपी मंगवाई।

लेकिन जब उसने कॉपी देखी तो वह हैरान रह गया।

जो उत्तर पुस्तिका उसे भेजी गई थी, उसमें न तो उसके लिखे जवाब थे और न ही हैंडराइटिंग उसकी थी। यानी CBSE ने किसी दूसरे छात्र की कॉपी वेदांत को भेज दी थी।

सोशल मीडिया पर पोस्ट करते ही शुरू हुई ट्रोलिंग

वेदांत ने इस पूरी घटना का स्क्रीनशॉट और कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर शेयर किया। उसने लिखा कि फिजिक्स में कम नंबर मिलने के बाद जब उसने कॉपी मंगवाई तो पता चला कि वह उसकी कॉपी ही नहीं है।

मामला वायरल होते ही सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। कुछ लोग CBSE से जवाब मांगने लगे, जबकि कई ट्रोल अकाउंट्स ने छात्र पर ही हमला शुरू कर दिया।

कुछ लोगों ने उसे “पाकिस्तानी एजेंट”, “एंटी नेशनल”, “सोरोस गैंग” और “डीप स्टेट का हिस्सा” तक बता दिया।

पत्रकार अशोक श्रीवास्तव और सोशल मीडिया यूजर “Mr Sinha” जैसे कई बड़े अकाउंट्स ने भी वेदांत पर सवाल उठाए। किसी ने उसे “कॉकरोच” कहा तो किसी ने दावा किया कि वह देश की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।

राहुल गांधी भी कूदे मैदान में

मामला बढ़ने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भी वेदांत के समर्थन में पोस्ट किया।

राहुल गांधी ने लिखा कि एक 17 साल का छात्र न्याय मांगने सोशल मीडिया पर आया और उसे BJP IT Cell ने “एंटी नेशनल”, “सोरोस एजेंट” और “डीप स्टेट” बता दिया।

राहुल ने सवाल उठाया कि आखिर एक छात्र को अपनी कॉपी की गलती बताने पर देशद्रोही क्यों कहा जा रहा है।

आखिरकार CBSE ने मानी गलती

जब विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया और सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठने लगे, तब CBSE ने आधिकारिक रूप से अपनी गलती स्वीकार की।

बोर्ड ने माना कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान गलती से किसी दूसरे परीक्षार्थी की फिजिक्स उत्तर पुस्तिका वेदांत को अपलोड करके भेज दी गई थी।

इसके बाद CBSE ने वेदांत को उसकी असली कॉपी उपलब्ध कराई और रिजल्ट में सुधार करने की बात कही।

वेदांत के भाई ने दावा किया कि सिर्फ वेदांत ही नहीं, बल्कि ऐसे कई और छात्र हैं जिन्हें गलत कॉपियां या गलत मूल्यांकन मिला है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस घटना के बाद शिक्षा विशेषज्ञ (Education Experts) और छात्र संगठन CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें भी अपेक्षा से बेहद कम अंक मिले हैं और वे अब अपनी कॉपियां दोबारा चेक करवाना चाहते हैं।

ट्रोल्स ने मांगी सफाई

CBSE की गलती सामने आने के बाद वे लोग भी बैकफुट पर आ गए जिन्होंने वेदांत को ट्रोल किया था। कई अकाउंट्स ने सफाई दी, जबकि कुछ ने माफी भी मांगी।

हालांकि इस घटना ने यह बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि बिना तथ्य जाने किसी छात्र को “देशद्रोही”, “पाकिस्तानी” या “एजेंट” कहना कितना खतरनाक हो सकता है।

मानसिक दबाव में छात्र

मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के समय छात्र पहले से ही भारी मानसिक दबाव में होते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया ट्रोलिंग किसी छात्र की मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

भारत में हर साल लाखों छात्र बोर्ड परीक्षा देते हैं और उनके भविष्य का बड़ा हिस्सा इन्हीं अंकों पर निर्भर करता है। ऐसे में मूल्यांकन में एक छोटी गलती भी किसी छात्र के करियर पर बड़ा असर डाल सकती है।

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