CBSE Career Counsellor: स्कूलों में करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

A digital illustration showing a student attending a CBSE career guidance and counselling webinar on a computer.

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्र कल्याण और भविष्य की योजना को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। बोर्ड ने अब अपने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए CBSE Career Counsellor और वेलनेस टीचर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और करियर संबंधी उलझनों को पेशेवर तरीके से सुलझाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

छात्रों के मानसिक और करियर विकास पर सीबीएसई का जोर

सीबीएसई ने अपने आधिकारिक नोटिस में स्पष्ट किया है कि अब माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को न केवल एक वेलनेस टीचर (Socio-Emotional Counsellor), बल्कि एक समर्पित करियर काउंसलर भी पूर्णकालिक आधार पर नियुक्त करना होगा। पहले के नियमों में केवल वेलनेस टीचर का प्रावधान था, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों और करियर विकल्पों की अधिकता को देखते हुए इस नियम में संशोधन किया गया है।

CBSE Career Guidance Webinar and Counselling Mandate 2026

क्या है नया छात्र-काउंसलर अनुपात?

बोर्ड द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों को छात्रों की संख्या के आधार पर नियुक्तियां करनी होंगी। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर, कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले प्रत्येक 500 छात्रों पर एक CBSE Career Counsellor नियुक्त करना अनिवार्य है। वहीं, वेलनेस टीचर के लिए भी प्रति 500 छात्रों पर एक पद निर्धारित किया गया है। जिन स्कूलों में छात्रों की कुल संख्या 300 से कम है, वहां पार्ट-टाइम आधार पर नियुक्तियां की जा सकती हैं।

नियुक्त उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग

केवल डिग्री होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सीबीएसई ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया है। नियुक्त किए गए सभी उम्मीदवारों को बोर्ड द्वारा निर्धारित 50 घंटे का कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (CBP) पूरा करना होगा। यह प्रोग्राम विशेष रूप से साइको-सोशल काउंसलिंग और करियर गाइडेंस की बारीकियों को समझने के लिए डिजाइन किया गया है।

वेलनेस टीचर और करियर काउंसलर की शैक्षणिक योग्यता

CBSE ने इन पदों के लिए योग्यता के मानक भी स्पष्ट कर दिए हैं। वेलनेस टीचर के लिए उम्मीदवार के पास साइकोलॉजी (Clinical/Applied/Educational) में मास्टर या बैचलर डिग्री होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सोशल वर्क (Mental Health) में मास्टर डिग्री या स्कूल काउंसलिंग में डिप्लोमा धारक भी इसके पात्र होंगे।

वहीं, करियर काउंसलर के पद के लिए योग्यता का दायरा थोड़ा विस्तृत रखा गया है। इसके लिए ह्यूमैनिटीज़, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट या टेक्नोलॉजी में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री के साथ करियर असेसमेंट की समझ होना जरूरी है। इन विशेषज्ञों से उम्मीद की जाती है कि उन्हें देश और विदेश में उच्च शिक्षा के विकल्पों और इंडस्ट्री ट्रेंड्स की गहरी जानकारी हो।

हब एंड स्पोक मॉडल से मिलेगी मजबूती

सीबीएसई ने स्कूलों को ‘काउंसलिंग हब एंड स्पोक स्कूल मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत संसाधन संपन्न स्कूल अपने आस-पास के अन्य स्कूलों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकते हैं। इससे उन स्कूलों को भी बेहतर संसाधन मिल सकेंगे जहां अभी बुनियादी ढांचे की कमी है।

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