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एपीएसयू रीवा में संगोष्ठी: स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और शारीरिक गतिविधियों पर दिया गया जोर

Cathedral at AU PSC RewaCathedral at AU PSC Rewa

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अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (एपीएसयू) रीवा के मनोविज्ञान और अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शंभूनाथ शुक्ल सभागार में “शारीरिक स्वास्थ्य से मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रघुराज किशोर तिवारी और विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात व्यवसायी व कला प्रेमी विभू सूरी उपस्थित रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकांत मिश्रा ने की, जबकि कुलसचिव नीरजा नामदेव, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शुभा तिवारी और अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. मृणाल श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य विद्वान मंच पर मौजूद रहे।

स्वागत उद्बोधन में कुलसचिव नीरजा नामदेव ने मन से आनंद प्राप्त करने और मनोमय कोष को सर्वश्रेष्ठ बताया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. श्रीकांत मिश्रा ने समाज में बढ़ रहे मानसिक अवसाद और बच्चों में पनप रही कुंठाओं पर चिंता जताई तथा मन की एकाग्रता को जरूरी बताया। प्रो. मृणाल श्रीवास्तव ने स्वस्थ मन के लिए शारीरिक श्रम और स्वास्थ्य को एक-दूसरे का पूरक करार दिया। वहीं, प्रो. शुभा तिवारी ने आज की ‘जेन-जी’ पीढ़ी को स्क्रीन टाइम सीमित करने और शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। विशिष्ट अतिथि विभू सूरी ने निरोगी काया को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति का मुख्य आधार बताते हुए युवाओं को खेलकूद और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेने को कहा।

मुख्य वक्ता डॉ. रघुराज किशोर तिवारी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में मोबाइल और स्क्रीन की लत को आज की सबसे बड़ी बीमारी बताते हुए उस पर नियंत्रण रखने की अपील की। उन्होंने भारतीय संस्कृति, गुरुकुल परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों और नारी सम्मान के महत्व को रेखांकित करते हुए युवाओं को जीवन की चुनौतियों का संघर्ष से सामना करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिए। इस सफल कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग की डॉ. स्मृति सिंह ने और आभार प्रदर्शन डॉ. ऋचा चतुर्वेदी ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं विश्वविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।

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