World Cancer Day 2026 के मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत में फिर और गले में कैंसर के मामले चिंताजनक रूप से ज्यादा हो रहे हैं। फॉर्टिस हॉस्पिटल के ऑंकोलॉजिस्ट डॉक्टर बी निरंजन नायक के अनुसार इसकी बड़ी वजह तंबाकू, सुपारी और शराब जैसी आदतें होती है। जिसका सीधा असर मुंह, गले और आवाज की नली पर पड़ता है।

तंबाकू और सुपारी, सबसे बड़ा जोखिम कारक
डॉक्टर के अनुसार भारत में धूमपान के अलावा बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद जैसे गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाला का अधिक इस्तेमाल होता है। यह सभी पदार्थ सीधे मुंह में जाकर टिशूज को नुकसान पहुंचाते हैं। सुपारी को अक्सर सुरक्षित ऑप्शन माना जाता है लेकिन डॉक्टर की रिसर्च के अनुसार सुपारी से भी कैंसर होता है। यही कारण है कि मुंह और गले के कैंसर के मामले भारत में हमें ज्यादातर देखने को मिलते हैं।
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शराब और तंबाकू का खतरनाक मेल
डॉक्टरों की रिसर्च के अनुसार शराब अपने आप में भी एक खतरा होती है लेकिन जब इसका सेवन आप तंबाकू के साथ करते हैं तो इसका खतरा कहीं गुना बढ़ जाता है। यह संयोजन मुंह और गले की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा देता है जिससे कैंसर की संभावना तेजी से बढ़ जाती है।
जागरूकता की कमी और देर से पहचान
भारत में गांव के इलाकों और काम आए वाले इलाकों में लोगों को शुरुआती लक्षणों की जानकारी नहीं होती है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव जैसे संकट को भी लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जिसका मतलब है कि मरीज अक्सर तब डॉक्टर के पास जाते हैं जब बीमारी गंभीर हो जाती है।
सामाजिक स्वीकृति भी बड़ी वजह
पान, सुपारी और तंबाकू कई जगह पर सामाजिक रूप से सामान्य होता है ये आदतें युवाओं और महिलाओं में ज्यादातर देखी जाती है। विज्ञापन और आसान से उपलब्ध होने के कारण लोग इसे अधिक खाते हैं और इससे cancer की समस्याओं को बढ़ाते हैं। डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि जब तक इन आदतों को लेकर समाज में सोच नहीं बदलेगी तब तक स्थिति में सुधार होना बहुत मुश्किल है।
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स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच की जरूरत
डॉक्टर के अनुसार गले और सिर में cancer होने की खास बात यह है कि इसके कई लक्षण शुरुआती चरण में ही दिखाई दे जाते हैं। अगर समय पर जांच हो जाए तो इलाज आसानी से सफल हो जाता है। लेकिन देश में संगठित स्क्रीनिंग कार्यक्रम और कैंसर केंद्र की कमी होने के कारण या संभव नहीं हो पता है विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू और शराब से दूरी जागरूकता और नियमित जांच ही इस गंभीर बीमारी के बचाव का उपाय है।
