Bundelkhand History : युद्ध पर केंद्रित दो ऐतिहासिक पुस्तकों विमोचन-रीवा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आर्ट पाइंट सांस्कृतिक शिक्षा समिति द्वारा नैकहाई युद्ध पर आधारित दो पुस्तकों का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 25 जनवरी, रविवार को अपराह्न 1 बजे, अर्बन ग्रिल रेस्टोरेंट, रीवा में सम्पन्न हुआ। इस अवसर को विशेष गरिमा प्रदान करने के लिए पेशवा बाजीराव और मस्तानी बा साहिबा के वर्तमान वंशज, नवाब ऑफ बांदा नवाब शादाब अली बहादुर, अपने पुत्र नवाब अरबाब अली बहादुर के साथ रीवा पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर विशेष बना दिया। रीवा में नैकहाई युद्ध पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों ‘नैकहाई जुज्झि’ और ‘अजीत फतेह’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में पेशवा बाजीराव और मस्तानी के वंशज नवाब शादाब अली बहादुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विमोचित पुस्तकें और उनके रचनाकार
इस आयोजन में जिन दो पुस्तकों का विमोचन हुआ, वे हैं-
“नैकहाई जुज्झि” – लेखक कुंवर रविरंजन सिंह
“अजीत फतेह” – लेखक देवेंद्र सिंह “हीरा”– दोनों ही पुस्तकें नैकहाई युद्ध की पृष्ठभूमि, रणनीति और परिणामों का सजीव तथा तथ्यात्मक वर्णन प्रस्तुत करती हैं। लेखकों ने इतिहास के इस अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन गौरवशाली अध्याय को शोध और साहित्यिक दृष्टि से सामने रखा है।

नैकहाई युद्ध – साहस और स्वाभिमान की कथा
नैकहाई युद्ध रीवा के महाराजा अजीत सिंह के शासनकाल में लड़ा गया था। उस समय नवाब बांदा अली बहादुर ने चौथ वसूली के उद्देश्य से अपने सेनानायक को रीवा पर आक्रमण के लिए भेजा था।इतिहास में दर्ज इस युद्ध की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि रीवा के मुट्ठी भर वीर सैनिकों ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए नायक का सिर काट दिया और युद्ध में विजय प्राप्त की। यह युद्ध केवल सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि रीवा की स्वाधीनता, आत्मसम्मान और रणनीतिक कौशल का प्रतीक माना जाता है। प्रस्तुत दोनों पुस्तकें इस संघर्ष को नए संदर्भों और प्रमाणों के साथ पाठकों के सामने रखती हैं।
सहयोगी संस्थाएं और सांस्कृतिक सहभागिता
इस आयोजन को सफल बनाने में मण्डप आर्ट रीवा, रावेन्द्र प्रताप सिंह शिक्षा समिति एवं रंग अनुभव का सक्रिय सहयोग रहा। कार्यक्रम में साहित्य, कला और इतिहास से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, लेखक, कलाकार एवं इतिहास प्रेमी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष-नैकहाई युद्ध पर आधारित इन दो पुस्तकों का विमोचन न केवल एक साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि यह रीवा और विंध्य क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त प्रयास भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान मिलता है और क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूती मिलती है।यह विमोचन समारोह इस बात का प्रमाण है कि इतिहास, साहित्य और संस्कृति जब एक मंच पर आते हैं, तो समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
