Budget: NRI प्रॉपर्टी सेल पर कर में राहत की मांग, क्या होंगे बड़े बदलाव!

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Budget 2026: बजट 2026 आने ही वाला है जी हां 1 फरवरी को बजट पेश होगा ऐसे में विदेशों में रह रहे भारतीयों यानी नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) के लिए भारत में प्रॉपर्टी बेचना अक्सर फायदे का सौदा साबित नहीं हो पाता इसके पीछे की वजह है कॉम्प्लेक्स टैक्स रूल्स और ऊंची TDS कटौती, ऐसे में आपको बताएं कि NRI काफी समय से टैक्स सिस्टम को आसान और समान बनाने की मांग कर रहे हैं. टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो NRI और प्रॉपर्टी खरीदने वालों दोनों को बड़ी राहत मिल सकती है.

भारतीय निवासी और NRI के लिए अलग नियम

गौरतलब है की भारतीय रहवासी और NRI के लिए नियम बिल्कुल अलग हैं. जी हां आपको बता दें कि, भारत में अगर कोई रेजिडेंट आदमी 50 लाख रुपये या उससे अधिक की प्रॉपर्टी बेचता है, तो खरीदार को केवल 1% TDS काटना होता है. यह प्रक्रिया सरल है और ज्यादा कंप्लायंस की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं, NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर खरीदार को ज्यादा रेट से TDS काटना पड़ता है. साथ ही उसे टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) लेना, टैक्स जमा करना और ई-टीडीएस रिटर्न फाइल करना जरूरी होता है. यह अतिरिक्त जिम्मेदारी कई बार खरीदारों को NRI से प्रॉपर्टी खरीदने से हतोत्साहित करती है.

लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (LTCG & STCG) पर भारी TDS

NRI अगर प्रॉपर्टी को 24 महीनों से ज्यादा समय बाद बेचता है, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है और खरीदार को 12.5% टीडीएस काटना पड़ता है. लेकिन 24 महीने से पहले बिक्री करने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस लगता है, जिस पर 30% TDS कटता है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि TDS बिक्री मूल्य पर कटता है, ना कि वास्तविक मुनाफे पर, इससे NRI का बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में फंस जाता है.

बजट में NRI टैक्स राहत की उम्मीद

गौरतलब है की NRI के पास आयकर विभाग से लोअर या नो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट लेने का ऑप्शन जरूर है, लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है.
टैक्स एक्सपर्ट्स सुझाव दे रहे हैं कि सरकार रेजिडेंट और NRI के टैक्स नियमों के बीच अंतर कम करे, आपको बताएं कि NRI के लिए भी रेजिडेंट की तरह आसान चलान और कम-स्टेटमेंट की व्यवस्था लागू की जा सकती है.

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण अब तक टैक्स सिस्टम को आसान बनाने पर जोर देती रही हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले बजट या नीतिगत फैसलों में NRI प्रॉपर्टी टैक्स नियमों को लेकर भी राहत मिल सकती है.

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