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ब्रिटिश बैंड कॉर्नशॉप का गाना Brimful of Asha भारतीय पार्श्व गायिका आशा भोंसले को एक खास ट्रिब्यूट था। जानिए इस कल्ट क्लासिक गाने के पीछे का दिलचस्प इतिहास।

Cornershop band members and singer Asha Bhonsle portrait for Brimful of Asha tribute story.Cornershop band members and singer Asha Bhonsle portrait for Brimful of Asha tribute story.

The cultural impact of the song Brimful of Asha by Cornershop.

संगीत की दुनिया में कुछ गाने ऐसे होते हैं जो सीमाओं को लांघकर वैश्विक पहचान बना लेते हैं। 90 के दशक के उत्तरार्ध में ब्रिटिश इंडी-रॉक बैंड ‘कॉर्नशॉप’ (Cornershop) ने Brimful of Asha रिलीज किया, जो न केवल चार्टबस्टर बना बल्कि दक्षिण एशियाई संस्कृति का प्रतीक भी बन गया। यह गाना महान भारतीय गायिका आशा भोंसले और भारतीय सिनेमा के संगीत इतिहास को एक भावुक श्रद्धांजलि था।

Brimful of Asha के पीछे की प्रेरणा

कॉर्नशॉप के फ्रंटमैन त्यविंदर सिंह (Tjinder Singh) ने इस गाने को एक खास उद्देश्य के साथ लिखा था। यह गाना उन यादों और सांस्कृतिक परिवेश के बारे में है, जिसमें ब्रिटेन में रह रहे दक्षिण एशियाई मूल के लोग पले-बढ़े। गाने के बोल पूरी तरह से भारतीय फिल्म संगीत (बॉलीवुड) और विशेष रूप से आशा भोंसले के प्रभाव पर केंद्रित हैं।

आशा भोंसले को ट्रिब्यूट

गाने का शीर्षक ‘ब्रिमफुल ऑफ आशा’ सीधे तौर पर आशा भोंसले के नाम की ओर इशारा करता है। 90 के दशक में जब पश्चिमी संगीत में एशियाई कलाकारों को वह पहचान नहीं मिल रही थी, तब इस गाने ने मुख्यधारा में अपनी जगह बनाई। ‘ब्रिमफुल’ का अर्थ यहाँ ‘भरोसे और उम्मीद से भरा हुआ’ है, जो भारतीय संगीत की उस ‘आशा’ को दर्शाता है जिसने लाखों लोगों का मनोरंजन किया।

फैटबॉय स्लिम का जादुई रीमिक्स

हालांकि मूल गाना 1997 में रिलीज हुआ था, लेकिन इसे वैश्विक लोकप्रियता डीजे नॉर्मन कुक, जिन्हें ‘फैटबॉय स्लिम’ के नाम से जाना जाता है, के रीमिक्स के बाद मिली। उन्होंने गाने की गति (tempo) को बढ़ाया और इसे एक डांस एंथम में बदल दिया। 1998 में इस रीमिक्स ने यूके सिंगल्स चार्ट में पहला स्थान हासिल किया और कॉर्नशॉप को रातों-रात स्टार बना दिया।

बोलों में छिपा भारतीय सिनेमा का इतिहास

अगर आप गाने के बोलों को ध्यान से सुनें, तो इसमें केवल आशा भोंसले ही नहीं, बल्कि लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गजों का भी उल्लेख मिलता है। गाने में ’78 RPM’ के रिकॉर्ड्स का जिक्र है, जो उस दौर की याद दिलाता है जब ग्रामोफोन पर फिल्में और उनके गाने सुने जाते थे।

सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक Brimful of Asha

केवल एक पॉप गाना नहीं था, बल्कि यह पश्चिम में रह रहे भारतीयों की ‘हाइब्रिड आइडेंटिटी’ का उत्सव था। इसने दिखाया कि कैसे भारतीय संगीत ने वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। आज भी यह गाना दुनिया भर के रेडियो स्टेशनों और रेट्रो पार्टियों में अपनी जगह बनाए हुए है।

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