रीवा। लक्ष्मणबाग संस्थान की भूमि पर रीवा के लक्ष्मणबाग से कुठुलिया मार्ग में बिछिया नदी पर जलमग्नीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा बैठक उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में किए है। बैठक में अपर मुख्य सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व शिवशेखर शुक्ला सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
भू-अर्जन की कार्रवाई के दिए निर्देश
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाकर भूमि अर्जन सहित आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग को भूमि अर्जन के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी ) शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए, ताकि भूमि अर्जन की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कर पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ एवं पूर्ण किया जा सके। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में अनावश्यक विलंब न हो तथा सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराएं।
सुगम आवागमन जरूरी
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र है। विश्वविद्यालय के नवीन भवन तक सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय के महत्व को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य से संबंधित सभी प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूर्ण की जाएं।
रीवा (मध्य प्रदेश) में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय (पूर्व में घोषित रामानुजाचार्य/रामानुज संस्कृत विश्वविद्यालय) का परिसर स्थापित किया जा रहा है। यह लक्ष्मणबाग परिसर और बिछिया क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है।
मुख्य जानकारी:
- स्थान: लक्ष्मणबाग परिसर / बिछिया, रीवा (मध्य प्रदेश)
- परियोजना लागत: लगभग ₹45 करोड़ से अधिक की लागत से नया विश्वविद्यालय भवन एवं परिसर का निर्माण किया जा रहा है।
- ताज़ा विकास: हाल ही में (नवंबर 2026 में) मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस संस्कृत विश्वविद्यालय के नए भवन और निर्माण कार्यों की समीक्षा की है तथा बिछिया नदी पर पुल और पहुंच मार्ग बनाने के निर्देश दिए हैं।
- उद्देश्य: विंध्य क्षेत्र में संस्कृत शिक्षा, वैदिक अध्ययन, कर्मकांड और भारतीय पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देना।

