Brahmin community in Rewa wrote a letter in blood: रीवा जिले में UGC के नए नियमों ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ के खिलाफ तीखा विरोध शुरू हो गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश सचिव सतीश चौबे और श्रावण सेना के जिला अध्यक्ष अनुराग मिश्रा, मुकेश पांडे, प्रकाश मिश्रा तथा संदीप तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लिखा पत्र भेजकर इन नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि UGC का यह नया कानून समाज को बांटने वाला और सामान्य वर्ग के अधिकारों के साथ अन्याय करने वाला है। उनका कहना है कि नियमों से शैक्षणिक संस्थानों में असंतुलन और वैमनस्य बढ़ने की आशंका है। सतीश चौबे ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसा कोई बदलाव स्वीकार्य नहीं जो समाज में विभाजन पैदा करे।उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं के विरुद्ध यह कानून नहीं वापस लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर यह विरोध देशव्यापी रूप ले सकता है।
खून से लिखे पत्र में भावनात्मक अपील करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह नियम सामाजिक समरसता के लिए खतरा है और शिक्षा नीति का उद्देश्य समाज को जोड़ना चाहिए, न कि अलगाव पैदा करना।UGC ने 13 जनवरी 2026 को इन नियमों को अधिसूचित किया था। इनके तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC), इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ये व्यवस्थाएं मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर फोकस करेंगी। सरकार का दावा है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए हैं।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह पेश करते हैं। जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का आरोप है कि इससे कैंपस में उनके खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है और अराजकता फैल सकती है। देशभर में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं, जिसमें कई जगहों पर खून से पत्र लिखने जैसे अनोखे तरीके अपनाए जा रहे हैं।फिलहाल UGC या केंद्र सरकार की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन इस घटना के बाद रीवा सहित प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और आंदोलन बढ़ने की संभावना है।
