Dharmendra Vinod Khanna Amitabh Bollywood Nostalgia: वह सुनहरा दौर जब स्टार का नाम ही मूवी के हिट होने के लिए काफी था

Dharmendra, Vinod Khanna and Amitabh Bachchan Bollywood Golden Era Nostalgia

Dharmendra Vinod Khanna Amitabh Bollywood Nostalgia: आज का सिनेमाई दौर भारी भरकम बजट, बड़े-बड़े हाईटेक वीएफएक्स पर टिका है। लेकिन एक समय था जब फिल्में केवल कलाकार के नाम पर ही सुपरहिट हो जाया करती थी। जी हां, यह बहुत सुनहरा दौर था जब धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन जैसे सितारे फिल्म में होना ही उस फ़िल्म की सफलता की गारंटी होती थी। भले ही दर्शकों को कहानी के बारे में भी कुछ पता नहीं होता था, ना मूवी का कोई गाना पहले से रिलीज होता था। केवल शहर या गांव की सड़कों पर लगते थे मूवी के पोस्टर, इन पोस्टर में दिखता था केवल हीरो का चेहरा और यह चेहरा ही काफी होता था थिएटर को हाउसफुल करने के लिए।

Dharmendra Vinod Khanna Amitabh Bollywood Nostalgia
Dharmendra Vinod Khanna Amitabh Bollywood Nostalgia

हीरो को देखने के लिए लोग हाउसफुल कर देते थे थियेटर

जी हां, हम उसे दौर की बात कर रहे हैं जब धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, राजेश खन्ना जैसे दिग्गज कलाकार अपने नाम के दम पर ही मूवी को हिट करवा देते थे। पोस्टर्स देखकर ही लोग थिएटर की ओर खिंचे चले जाते, थिएटर हाउसफुल हो जाते थे और मूवी हो जाती थी सुपर डुपर हिट। यह वह समय था जब स्टार पावर सच में पावर हुआ करती थी और लोग केवल फिल्म नहीं बल्कि स्टार को देखने, उसके डायलॉग सुनने थिएटर में जाया करते थे। और आज हम आपको ऐसे ही कुछ दिक्कज़ कलाकारों के बारे में बताएंगे जिनकी वजह से बॉलीवुड की इमारत शान से खड़ी है।

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  • धर्मेंद्र: धर्मेंद्र का स्टारडम किसी जादू से कम नहीं था। उनका एक्शन, उनकी आकर्षक बॉडी लैंग्वेज, उनकी मुस्कुराहट पर पूरा भारत फिदा था। शोले, सीता-गीता, चुपके-चुपके, धर्मवीर जैसी फिल्मों में धर्मेंद्र के दमदार परफॉर्मेंस की वजह से लोग उन्हें बॉलीवुड के ही मैन का दर्जा दे चुके थे। लोग मान चुके थे कि यदि पोस्टर में धर्मेंद्र है तो मतलब पिक्चर सुपरहिट होगी। इस दौर में VFX नहीं होता था। बल्कि एक पांच लाइन, एक इमोशनल डायलॉग ही पूरे सिनेमा घर को हिलाने के लिए काफी था।

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  • विनोद खन्ना: विनोद खन्ना की बॉडी लैंग्वेज में कुछ अजीब सा आकर्षण था। उनकी फिल्म को हिट करने के लिए किसी बड़े सेट या ग्राफिक की जरूरत नहीं पड़ती थी बल्कि उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता था कि वह यदि फिल्में सेकंड लीड में भी है तब भी लोग उनकी फिल्म देखने के लिए जरूर जाएंगे। जी हां, कुर्बानी, दयावान, मेरा गांव मेरा देश, हाथ की सफाई जैसी फ़िल्में इसीलिए सुपरहिट हुई क्योंकि उसमें विनोद खन्ना थे।
  • अमिताभ बच्चन: सदी के महानायक का दर्जा अमिताभ बच्चन को ऐसे ही नहीं मिला है। अमिताभ बच्चन उस दौर में सितारे बने जब उनकी एक आवाज ही थिएटर को हिलाने के लिए काफी होती थी। दीवार, जंजीर, डॉन, सुहाग, मुकद्दर का सिकंदर में अमिताभ बच्चन ने एंग्री यंग मैन की भूमिका निभाई। उनके डायलॉग ही वीएफएक्स इफेक्ट देने के लिए काफी होते थे। लोग उनका संघर्ष और उनका विद्रोह देखने के लिए थिएटर में भागते थे।

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