Body Donation Awareness Rewa-वृद्धाश्रम रामकरण का पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को समर्पित,गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ सम्मान-मानव जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के लिए उपयोगी बनने में निहित होती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण रीवा जिले में सामने आया, जहाँ भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के अंतर्गत संचालित वृद्धाश्रम में निवासरत स्वर्गीय श्री रामकरण गुप्ता को मरणोपरांत दधीचि सम्मान प्रदान किया गया। उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा और शोध हेतु श्याम शाह मेडिकल कॉलेज को समर्पित किया गया, जिसे जिला प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। रीवा के पितामह सदन वृद्धाश्रम निवासी श्री रामकरण गुप्ता को मरणोपरांत दधीचि सम्मान। रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा देहदान, जिला प्रशासन ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर।
मरणोपरांत समाज सेवा की अनूठी पहल
भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, रीवा द्वारा संचालित पितामह सदन वृद्धाश्रम में विगत 12 वर्षों से निवासरत श्री रामकरण गुप्ता का दिनांक 2 जनवरी 2026 की सुबह निधन हो गया। अपने जीवन की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया, ताकि भावी डॉक्टरों की शिक्षा एवं चिकित्सा विज्ञान के विकास में उनका योगदान अमर बना रहे।
यह निर्णय न केवल सामाजिक चेतना को जागृत करने वाला है, बल्कि अंगदान एवं देहदान जैसे विषयों पर समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला भी है।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई श्रद्धांजलि
इस अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा श्री रामकरण गुप्ता को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके निस्वार्थ योगदान और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।
सम्मान सभा में गणमान्य जनों की उपस्थिति
श्रद्धांजलि एवं सम्मान सभा में अनेक वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से-
डॉ प्रभाकर चतुर्वेदी-चेयरमैन, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी रीवा
डॉ सुनील अग्रवाल-अधिष्ठाता, श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय
राजेंद्र पांडेय-सचिव, रेडक्रॉस सोसायटी सहित डॉ अर्जुन सिंह परमार,डॉ सुशील त्रिपाठी,डॉ अजीत सिंह,डॉ रघुवेंद्र सिंह
,पीयूष कुमार मिश्र व परिजन के रूप में दीपक गुप्त एवं विनोद गुप्त-सभी उपस्थित जनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निर्णय को समाज के लिए अनुकरणीय बताया।
रेडक्रॉस और वृद्धाश्रम की भूमिका
भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी रीवा द्वारा संचालित पितामह सदन वृद्धाश्रम न केवल बुजुर्गों को आश्रय देता है, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता भी प्रदान करता है। श्री रामकरण गुप्ता का यह निर्णय रेडक्रॉस की मानवीय सोच और सेवा भाव को और अधिक सशक्त करता है।
निष्कर्ष (Conclusion) – स्वर्गीय श्री रामकरण गुप्ता का जीवन और उनका मरणोपरांत लिया गया निर्णय समाज के लिए एक अनमोल प्रेरणा है। देहदान जैसे पुनीत कार्य से उन्होंने यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी मानव समाज की सेवा की जा सकती है। जिला प्रशासन, रेडक्रॉस सोसायटी और चिकित्सा जगत द्वारा दिया गया सम्मान उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह घटना निस्संदेह समाज में सेवा, संवेदना और वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देने वाली है।
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