बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन को मिलते स्पष्ट बहुमत ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बड़ी जीत के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया के जरिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को सीधी चुनौती दी है, जिसे ‘ठाकरे युग’ की समाप्ति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
निशिकांत दुबे का ‘X’ पोस्ट और सियासी हमला
परिणामों के बीच सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक आक्रामक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि वे जल्द ही मुंबई आकर उद्धव और राज ठाकरे से मुलाकात करेंगे। दुबे के इस बयान को उनके पुराने ‘भाषा विवाद’ वाले रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। सांसद का यह आत्मविश्वास सीधे तौर पर भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता और क्षेत्रीय दलों की घटती ताकत को दर्शाता है।
भाषा विवाद और पुरानी रंजिश की पृष्ठभूमि
निशिकांत दुबे और ठाकरे परिवार के बीच यह तल्खी नई नहीं है। पिछले साल जुलाई में जब मनसे कार्यकर्ताओं ने गैर-मराठी दुकानदारों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की थी, तब दुबे ने कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने तब चुनौती देते हुए कहा था कि अगर साहस है तो दक्षिण भारतीय या उर्दू भाषियों को रोकें, यूपी-बिहार आने पर कड़ा जवाब मिलेगा। अब BMC चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने उसी संदर्भ में मुंबई आने का ऐलान किया है।
क्या फेल हो गया ठाकरे भाइयों का ‘मराठी कार्ड’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में उद्धव और राज ठाकरे ने एक साथ आकर ‘मराठी मानुष’ और क्षेत्रीय गौरव का कार्ड खेलने की कोशिश की थी। हालांकि, रुझान बताते हैं कि मतदाताओं ने विकास और राष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे को प्राथमिकता दी है। मुंबई जैसे कॉस्मोपॉलिटन शहर में भाजपा की बढ़त यह साबित करती है कि अब केवल भाषाई पहचान के आधार पर सत्ता हासिल करना कठिन हो गया है।
महाराष्ट्र के अन्य नगर निकायों में भी भाजपा की लहर
सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि ठाणे, पुणे और नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में भी भाजपा गठबंधन ने मजबूत पकड़ बनाई है। निशिकांत दुबे के बयान इस व्यापक जीत के उत्साह को दर्शाते हैं। उन्होंने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि मुंबई अब किसी खास परिवार या विचारधारा की ‘जागीर’ नहीं रही, बल्कि यहां ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति प्रभावी हो चुकी है।
आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति का रुख
निशिकांत दुबे की यह चुनौती आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नए विवादों को जन्म दे सकती है। जहां एक तरफ भाजपा इस जीत को एक नए युग की शुरुआत मान रही है, वहीं ठाकरे गुट के लिए यह अपने अस्तित्व को बचाने का संकट है। मुंबई पहुंचने का दुबे का ऐलान यह साफ करता है कि भाजपा अब विपक्षी नेताओं को उनके ही गढ़ में घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
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