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क्या यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर का पता लगाया जा सकता है? बर्मिंगम यूनिवर्सिटी की इस नई तकनीक, इसके लक्षण और फायदों के बारे में विस्तार से पढ़ें।

यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसरयूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर

यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर

कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई और क्रांतिकारी खोज सामने आई है। ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) एक ऐसे यूरिन टेस्ट का परीक्षण कर रही है, जो घर पर ही किया जा सकता है। यह नया टेस्ट ब्लैडर कैंसर के 10 में से 9 से अधिक मामलों (लगभग 92%) का सटीक पता लगाने में सक्षम है। यूरोपियन यूरोलॉजी ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यह तकनीक मरीजों को लंबी वेटिंग लिस्ट और दर्दनाक जांच प्रक्रियाओं से बचाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंगम और डायग्नोस्टिक्स कंपनी ‘नॉनाकस‘ द्वारा किए गए इस शोध में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के सात अस्पतालों के लगभग 1,000 मरीजों को शामिल किया गया था। इस नए तरीके से न केवल बीमारियों का समय पर पता चलेगा, बल्कि स्वास्थ्य प्रणालियों पर से अतिरिक्त बोझ भी कम होगा।

ब्लैडर कैंसर क्या है और यह कितना गंभीर हो सकता है?

मूत्राशय यानी ब्लैडर हमारे शरीर का वह अंग है जहाँ पेशाब जमा होता है। जब ब्लैडर की आंतरिक कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, तो इसे मूत्राशय का कैंसर या ब्लैडर कैंसर कहा जाता है। यह बीमारी कितनी गंभीर रूप ले सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर का आकार कितना बड़ा है और क्या यह शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका है।

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कैंसर का समय रहते पता चलना और तुरंत इलाज शुरू होना मरीज की जान बचा सकता है। यदि इसका शुरुआती चरण में ही निदान हो जाए, तो इसे शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोका जा सकता है।

ब्लैडर कैंसर के मुख्य लक्षण और कारण

नया यूरिन टेस्ट: 10 में से 9 से अधिक मामलों की होगी पहचान

इस नए परीक्षण को ‘गैलीज यूरिन टेस्ट’ (Gallys Urine Test) नाम दिया गया है। इस टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। परीक्षण में पाया गया कि इसने 92% कैंसर मामलों को सही-सही पहचाना।

इससे भी अधिक राहत की बात यह है कि यदि टेस्ट का परिणाम निगेटिव आता है, तो इस बात की 99% से अधिक संभावना होती है कि मरीज को मूत्राशय का कैंसर नहीं है। इससे मरीज को बेवजह के मानसिक तनाव और अतिरिक्त मेडिकल टेस्ट्स से मुक्ति मिलती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंगम और नॉनाकस की रिसर्च

इस तकनीक का मूल विकास यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंगम द्वारा ‘कैंसर रिसर्च यूके‘ की फंडिंग से किया गया था। बाद में एक कमर्शियल लाइसेंसिंग समझौते के तहत डायग्नोस्टिक्स कंपनी नॉनाकस ने इसका व्यावसायीकरण किया।

अध्ययन के सह-लेखक प्रोफेसर रिचर्ड ब्रायन के अनुसार, वर्षों की प्रयोगशाला रिसर्च के बाद वास्तविक मरीजों पर इसके इतने बेहतर परिणाम देखना बेहद उत्साहजनक है। इस प्रक्रिया से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी और कैंसर रिसर्च यूके को आगे के शोध के लिए पुनर्निवेशित किया जाता है।

जेनेटिक मटीरियल और डीएनए म्यूटेशन की जांच

यह टेस्ट इस सिद्धांत पर काम करता है कि कैंसर कोशिकाएं पेशाब में कुछ जेनेटिक मटीरियल छोड़ती हैं।

सिस्टोस्कोपी की तुलना में यूरिन टेस्ट कितना प्रभावी है?

वर्तमान में मूत्राशय के कैंसर की जांच के लिए ‘सिस्टोस्कोपी’ (Cystoscopy) का उपयोग प्राथमिक मानक के रूप में किया जाता है। सिस्टोस्कोपी एक इनवेसिव (Invasive) प्रक्रिया है, जिसमें मरीज के मूत्रमार्ग के रास्ते ब्लैडर के अंदर एक छोटा कैमरा युक्त ट्यूब डाला जाता है। यह प्रक्रिया मरीजों के लिए असुविधाजनक और कभी-कभी कष्टदायक होती है।

विशेषतापारंपरिक सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy)नया गैलीज यूरिन टेस्ट (Gallys Urine Test)
प्रक्रिया का प्रकारइनवेसिव (कैमरा शरीर के अंदर डाला जाता है)नॉन-इनवेसिव (केवल पेशाब का सैंपल)
सुविधाअस्पताल जाना अनिवार्य, समय साध्यघर पर आसानी से किया जा सकता है
सटीकता दरसीधा दृश्य निरीक्षण (High)92% कैंसर पहचान, 99% निगेटिव सटीकता
मरीज का अनुभवदर्द या असुविधा की संभावनापूरी तरह से दर्द रहित और सरल

इनवेसिव प्रक्रियाओं से मुक्ति और वेटिंग लिस्ट में कमी

ब्रिटेन जैसे देशों में हर साल 3,000,000 (तीन लाख) से अधिक सिस्टोस्कोपी की जाती हैं, जिससे अस्पतालों में लंबी वेटिंग लिस्ट बन जाती है। ‘कैंसर रिसर्च यूके’ की मिशेल मिशेल के अनुसार, कई मरीजों को सही डायग्नोसिस के लिए आवश्यकता से अधिक लंबा इंतजार करना पड़ता है।

यह यूरिन टेस्ट सिस्टोस्कोपी का पूर्ण विकल्प तो नहीं है, लेकिन यह एक उत्कृष्ट फिल्टर के रूप में काम करता है:

  1. हाई-रिस्क मरीजों की पहचान: डॉक्टरों को तुरंत पता चल जाएगा कि किन मरीजों को वास्तव में तत्काल सिस्टोस्कोपी की आवश्यकता है।
  2. समय की बचत: जिन मरीजों का टेस्ट निगेटिव आता है, वे अनावश्यक इनवेसिव जांच से बच सकते हैं।
  3. संसाधनों का सही उपयोग: अस्पतालों की वेटिंग लिस्ट छोटी होगी और गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सकेगा।

ब्लैडर कैंसर के शुरुआती संकेत मिलने पर क्या करें?

यदि आपको अपने पेशाब के रंग में कोई बदलाव दिखे या यूरिन में खून के अंश नजर आएं, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यद्यपि पेशाब में खून आने का कारण केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि सामान्य यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या किडनी स्टोन भी हो सकता है, फिर भी डॉक्टर से जांच कराना अनिवार्य है।

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कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से इलाज की सफलता दर कई गुना बढ़ जाती है। आधुनिक तकनीक और इस तरह के नॉन-इनवेसिव यूरिन टेस्ट आने वाले समय में कैंसर डायग्नोस्टिक्स का चेहरा पूरी तरह बदल देंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: क्या नया यूरिन टेस्ट पूरी तरह से सिस्टोस्कोपी की जगह ले सकता है?

Ans: नहीं, यूरिन टेस्ट सिस्टोस्कोपी का पूर्ण विकल्प नहीं है। हालांकि, यह डॉक्टरों को उन उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान करने में मदद करता है जिन्हें तुरंत सिस्टोस्कोपी की आवश्यकता है, जिससे अन्य मरीज अनावश्यक इनवेसिव जांच से बच सकते हैं।

Q2: गैलीज यूरिन टेस्ट कैंसर की पहचान कैसे करता है?

Ans: यह टेस्ट यूरिन में कैंसर कोशिकाओं द्वारा छोड़े गए जेनेटिक मटीरियल का विश्लेषण करता है। यह 23 अलग-अलग जीनों में मौजूद 450 से अधिक डीएनए म्यूटेशन की जांच करके ब्लैडर कैंसर की उपस्थिति या अनुपस्थिति का सटीक पता लगाता है।

Q3: ब्लैडर कैंसर का सबसे पहला और मुख्य लक्षण क्या है?

Ans: ब्लैडर कैंसर का सबसे प्रमुख लक्षण पेशाब में खून आना (Hematuria) है। इसके अलावा बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन या दर्द होना और निचले पेट में अकारण दर्द होना भी इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं।

Q4: नए यूरिन टेस्ट के परिणाम कितने सटीक और विश्वसनीय हैं?

Ans: शोध के अनुसार, इस टेस्ट ने ब्लैडर कैंसर के 92% मामलों की सही पहचान की है। इसके अतिरिक्त, यदि टेस्ट का परिणाम निगेटिव आता है, तो मरीज को कैंसर न होने की संभावना 99% से अधिक होती है।

Q5: ब्लैडर कैंसर होने का जोखिम किन लोगों में सबसे ज्यादा होता है?

Ans: 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में ब्लैडर कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा, जो लोग धूम्रपान करते हैं या उद्योगों में हानिकारक रसायनों के संपर्क में आते हैं, उनमें यह जोखिम काफी बढ़ जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंगम और नॉनाकस द्वारा विकसित यह नया गैलीज यूरिन टेस्ट ब्लैडर कैंसर के डायग्नोसिस में एक ऐतिहासिक कदम है। 92% संवेदनशीलता और 99% निगेटिव सटीकता के साथ, यह तकनीक न केवल मरीजों को दर्दनाक सिस्टोस्कोपी प्रक्रिया के तनाव से बचाएगी, बल्कि अस्पतालों में लंबी वेटिंग लिस्ट को भी कम करेगी। सही समय पर कैंसर की पहचान ही इसके सफल इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है, और यह टेस्ट इस दिशा में एक बेहद उम्मीद जगाने वाली पहल है।

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