BJP Rajya Sabha Candidates : साल 2026 में होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने नए उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। भाजपा ने 9 उम्मीदवारों के नामों की शोषण की है। इनमें नितिन बिहार से नवीन का नाम भी शामिल है। इस सूची में भाजपा ने एक बार फिर अपने ‘बड़े वोट बैंक’ यानी सवर्ण वर्ग पर फोकस किया है। जबकि ओबीसी, जो देश की सबसे बड़ी संख्या में हैं, उन्हें दूसरे नंबर पर ही रखा है। ऐसे में भाजपा के भीतर ब्राह्मण और ओबीसी नेताओं के बीच खटपट होने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव में BJP ने सवर्ण वर्ग का रखा ध्यान
भाजपा द्वारा घोषित राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों में सवर्ण वर्ग को खास तवज्जो दी गई है, जिसमें कुल 9 उम्मीदवारों में से 5 सामान्य जाति से हैं, जबकि 4 को ओबीसी व एसटी वर्ग से चुना गया है। यह ध्यान देने वाली बात है कि देश में ओबीसी की संख्या सबसे अधिक होने के बावजूद, पार्टी ने सवर्णों को ही ज्यादा टिकटें दी हैं।
भाजपा के 9 उम्मीदवारों की लिस्ट
बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार
असम से तेराश गोवाला और जेगेन मोहन
ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार
छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा
हरियाणा से संजय भाटिया
पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा


भाजपा ने नाराज सवर्ण समाज को खुश करने की कोशिश की
बिहार की राजनीति में सोशल बैलेंस बनाने के लिए भाजपा ने दो महत्वपूर्ण चेहरे उतारे हैं। इनमें से एक नितिन नवीन का नाम है, जो कायस्थ (सामान्य) समाज से आते हैं और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के प्रभारी और बिहार भाजपा के मजबूत नेता माने जाते हैं। वहीं, बिहार से ही शिवेश कुमार को भी उम्मीदवार बनाया गया है, जो राजपूत (सामान्य) जाति से हैं। इस कदम को सवर्ण मतदाताओं को खुश करने की रणनीति माना जा रहा है।
हरियाणा की राजनीति में पंजाबी समुदाय के बड़े नेता और पूर्व सांसद संजय भाटिया (सामान्य) को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने गैर-जाट वोट बैंक को मजबूत किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल से पार्टी के अनुभवी नेता राहुल सिन्हा को मौका मिला है, जो कायस्थ (सामान्य) समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं और पहले प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ओडिशा में भी अनुभवी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल को उम्मीदवार बनाया गया है, जो ब्राह्मण (सामान्य) समाज से आते हैं।
भाजपा ने 3 OBC उम्मीदवार घोषित किए
पिछड़े वर्ग और जनजातीय समुदाय को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने असम और छत्तीसगढ़ में खास प्लान किया है। असम से तेराश गोवाला को उम्मीदवार बनाया गया है, जो चाय जनजाति (ओबीसी) से हैं और चाय बागान मजदूरों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वहीं, असम के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जोगेन मोहन, जो अहोम (ओबीसी) समुदाय का बड़ा चेहरा हैं, को भी मौका मिला है। छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग, खासकर कुर्मी समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए लक्ष्मी वर्मा को चुना गया है। साथ ही, ओडिशा में हाल ही में बीजेडी छोड़कर भाजपा में आए सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के मजबूत चेहरे माने जाते हैं।
भाजपा ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को कायम रखा
इस पूरी लिस्ट का विश्लेषण करें तो साफ है कि भाजपा ने इस बार सवर्ण वर्ग को प्राथमिकता दी है। 5 सामान्य और 4 ओबीसी/एसटी उम्मीदवारों के इस गणित से पता चलता है कि पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को कायम रखते हुए सोशल इंजीनियरिंग के जरिए अन्य वर्गों को भी साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
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