BJP On UGC New Rules : देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक नए नियम को लेकर बहस शुरू हो गई है। इस बहस का कारण है सवर्णों का यूजीसी के इस नए नियम का विरोध करना। दरअसल, यूजीसी की ओर से 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 के एक प्रावधान को लेकर नया फरमान जारी हुआ था। जिसे जनरल केटेगरी के युवा मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया।
UGC के नियम के नियम 3(C) का विरोध क्यों?
UGC के नए नियम के नियम 3(C) को लेकर सवाल उठ रहें हैं। यूजीसी के इस नए नियम को सवर्ण युवा मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बता रहें हैं। सवर्णों का कहना है कि जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के मकसद से बनाया गया ये नियम एकेडमिक आज़ादी और संस्थानों की स्वायत्तता को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि बीजेपी और संघ दोनों ने इस नियम का समर्थन किया है।
निशिकांत दुबे ने कहा- कोई भेदभाव नहीं हो रहा
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ‘एक्स’ पर लिखा कि अगर मोदी जी हैं तो सभी संभव है। उन्होंने कहा कि यूजीसी नोटिफिकेशन से संबंधित भ्रांतियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के अनुसार सभी वर्गों के बीच कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रधानमंत्री मोदी के ही प्रयास का परिणाम है। मंडल आयोग लागू होने के बाद से राजनीतिक पार्टियों ने सरकार बनाई, लेकिन न्याय केवल मोदी जी ने ही दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि यूजीसी से जुड़ी भ्रांतियां भी जल्द ही समाप्त होंगी।
उन्होंने यूजीसी का समर्थन करते हुए कहा था कि किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी का पत्र साफ कह रहा है कि किसी भी समाज, जाति, धर्म या वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान के अनुच्छेद 14 का सम्मान करने का आश्वासन भी दिया।
RSS ने किया यूजीसी का समर्थन
वहीं, आरएसएस से जुड़े मुस्लिम मंच के संयोजक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि यूजीसी के मुद्दे पर समाज को बांटने की कोशिश करने वाले लोग सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि नए नियमों का मकसद कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और विकलांगता के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी बनाई जाएगी, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगी, जैसे डिग्री रुकवाना या संस्थान की मान्यता रद्द करना।
पूर्व यूजीसी चेयरमैन जगदीश कुमार ने क्या कहा?
इस बीच, पूर्व यूजीसी चेयरमैन जगदीश कुमार ने कहा कि सरकार ने उच्च शिक्षा के नियमन में एकीकरण का फैसला किया है। इसके तहत यूजीसी, AICTE और NCTE को मिलाकर विकसित भारत शिक्षा संस्थान (VBSA) बनाया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।
