मऊगंज में बड़ा प्रशासनिक फेल: पोर्टल से ‘गायब’ हो गई कुम्हार-प्रजापति जाति, हजारों छात्रों का भविष्य अधर में

Big administrative failure in Mauganj

Big administrative failure in Mauganj: नवगठित मऊगंज जिले में एक गंभीर प्रशासनिक चूक ने प्रजापति (कुम्हार) समाज को गहरे संकट में डाल दिया है। वर्षों से रीवा जिले में अनुसूचित जाति (SC) के रूप में दर्ज इस समाज का नाम जिला बनते ही सरकारी ई-पोर्टल से पूरी तरह गायब हो गया। इसके चलते समाज के हजारों छात्र-छात्राएं जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, आरटीई दाखिला और सरकारी नौकरियों से वंचित हो रहे हैं। समस्या इतनी गंभीर है कि लोक सेवा केंद्रों पर युवा रोज-रोज ठोकर खा रहे हैं, जवाब एक ही मिलता है “पोर्टल में नाम नहीं है, इसलिए प्रमाण पत्र नहीं बन सकता!” इस तकनीकी खामी के कारण स्कूल दाखिले अटक रहे हैं, छात्रवृत्ति नहीं मिल रही, पढ़ाई छूट रही है और कई युवाओं की सरकारी नौकरी की उम्र सीमा निकल रही है। अनुमान है कि 50 हजार से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।

आक्रोशित समाज का बड़ा कदम
मंगलवार शाम 4 बजे अखिल भारतीय कुम्हार महासभा के जिलाध्यक्ष राममिलन प्रजापति के नेतृत्व में प्रजापति समाज ने कलेक्टर संजय कुमार जैन के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तत्काल सुधार की मांग की गई है, साथ ही उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। समाज ने पहले ही कई स्तरों पर शिकायत की है। कलेक्टर कार्यालय से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक। विधायक नरेंद्र प्रजापति, प्रदीप पटेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को अवगत कराया। मामला विधानसभा में भी उठाया गया और कलेक्टर स्तर से पत्राचार हुआ। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। समाज का कहना है कि रीवा जिले में वे SC सूची में दर्ज थे, लेकिन मऊगंज में किसी भी श्रेणी में नहीं दिख रहे।

निराकरण की प्रक्रिया चल रही
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने बताया कि यह मामला राज्य शासन को भेजा जा चुका है और शीघ्र निराकरण की प्रक्रिया चल रही है।जिले के गठन के साथ विकास की उम्मीदें जगने के बजाय यह समस्या समाज के लिए बड़ा झटका बन गई है। प्रजापति समाज अब न्याय की आस में है – सवाल है कि कब तक चलेगा यह इंतजार? प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग जोरों पर है, ताकि हजारों युवाओं का भविष्य बच सके।

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