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MP: राजस्थान पुलिस की SOG ने भोपाल में फर्जी डिग्री रैकेट पर मारा बड़ा छापा

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Bhopal Sri Sathya Sai University Raid: राजस्थान में सरकारी नौकरियों (खासकर पीटीआई भर्ती-2022) के लिए चल रहे फर्जी डिग्री और मार्कशीट के बड़े रैकेट को ध्वस्त करने की दिशा में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने बड़ा एक्शन लिया है। राजस्थान पुलिस की यह इकाई मध्य प्रदेश में STF की तरह काम करती है।

Bhopal Sri Sathya Sai University Raid: राजस्थान में सरकारी नौकरियों के लिए चल रहे फर्जी डिग्री और मार्कशीट के बड़े गिरोह को नेस्तनाबूद करने के लिए राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने मध्य प्रदेश में बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को SOG की पांच विशेष टीमें भोपाल पहुंचीं और सीहोर से भोपाल के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्य रूप से राजस्थान में PTI (शारीरिक शिक्षा शिक्षक) भर्ती 2020 से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच से संबंधित है।

छापेमारी के प्रमुख ठिकाने

राजस्थान SOG की टीमों ने भारी पुलिस बल के साथ भोपाल के गांधीनगर, नर्मदापुरम रोड और अरेरा कॉलोनी स्थित शिक्षण समूह के संस्थानों पर दबिश दी। इनमें श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी (सीहोर-भोपाल रोड, ग्राम पचामा) और इससे जुड़े अन्य कॉलेज शामिल हैं। टीम ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट को बंद कर दिया और स्टाफ तथा छात्रों की आवाजाही पर रोक लगा दी। जांच मुख्य रूप से परीक्षा सेल और प्रशासनिक ब्लॉक में केंद्रित रही, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की तलाश की गई।

इसके अलावा, शिक्षण समूह के चेयरमैन सुनील कपूर के अरेरा कॉलोनी स्थित निजी निवास (10 नंबर) और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां भी सघन तलाशी ली गई। टीम ने परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की।

रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गईं

यूनिवर्सिटी प्रबंधन के मुकेश तिवारी और अंकित जोशी ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि राजस्थान से आई टीम केवल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए आई है। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने इसे फर्जी डिग्री जारी करने के संदेह में गहन जांच बताया। SOG के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मेश्राम ने पुष्टि की कि जांच जारी है और रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।

फर्जीवाड़ा 2013 से 2022 के बीच का बताया जा रहा

जांच में सामने आया है कि श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से जारी कम से कम 67 डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। ये डिग्रियां ‘बैक डेट’ (पुरानी तारीखों) में तैयार की गई थीं, ताकि अभ्यर्थी राजस्थान की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकें। आरोप है कि अभ्यर्थी कभी भोपाल में पढ़ाई के लिए नहीं आए, लेकिन भारी रकम देकर बिना परीक्षा या उपस्थिति के डिग्रियां प्राप्त कीं। यह फर्जीवाड़ा मुख्य रूप से 2013 से 2022 के बीच का बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल राजस्थान में सरकारी नौकरियां हासिल करने के लिए किया गया। विशेष रूप से PTI भर्ती 2020 में कई अभ्यर्थियों ने इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया था।

छापेमारी से बड़े खुलासे की उम्मीद

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच अभी जारी है और फर्जी डिग्री गिरोह के अन्य तारों को खंगाला जा रहा है। यह कार्रवाई राजस्थान में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। SOG ने पहले भी ऐसे कई मामलों में सख्त एक्शन लिया है, और इस छापेमारी से बड़े खुलासे की उम्मीद है।

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