Bhopal Metro: भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017-18 में अनुमानित 6,941 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 10,033 करोड़ रुपये हो गई है। इस तरह प्रति किलोमीटर लागत 223 करोड़ से बढ़कर 323 करोड़ रुपये पहुंच गई। प्रमुख कारणों में परियोजना में देरी, कोरोना महामारी, कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और डिजाइन में बदलाव शामिल हैं।
Bhopal Metro: भोपाल की मेट्रो परियोजना की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2017-18 में जब यह परियोजना शुरू हुई थी, तब इसका कुल अनुमानित खर्च 6,941 करोड़ रुपये था। उस समय प्रति किलोमीटर लागत करीब 223 करोड़ रुपये थी। लेकिन अब वर्ष 2025 तक संशोधित अनुमान के अनुसार परियोजना की कुल लागत बढ़कर 10,033 करोड़ रुपये हो गई है।
लागत में 3,092 करोड़ रुपये का इजाफा
पहले चरण के तहत बन रहे करीब 31 किलोमीटर रूट की प्रति किलोमीटर लागत अब 323 करोड़ रुपये पहुंच गई है। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में प्रति किलोमीटर करीब 100 करोड़ रुपये अधिक खर्च आ रहा है। कुल मिलाकर सात साल में परियोजना की लागत में 44 प्रतिशत यानी 3,092 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
बढ़ोतरी के प्रमुख कारण
- निर्माण कार्य में हुई लंबी देरी
- कोरोना महामारी के कारण काम रुकना
- सीमेंट, स्टील समेत कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल
- जीएसटी और अन्य करों में बदलाव
- कुछ जगहों पर डिजाइन में किए गए संशोधन
- तकनीकी जांच और नए सुरक्षा मानकों के कारण धीमी गति से काम
देरी से लागत बढ़ना आम बात
शहरी परिवहन के विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में समय के साथ लागत बढ़ना कोई नई बात नहीं है। कई बार 8-10 साल की देरी होने पर परियोजना की लागत दोगुनी-तिगुनी तक हो जाती है। भोपाल मेट्रो के मामले में भी समय बढ़ने के साथ खर्च में इजाफा स्वाभाविक माना जा रहा है।
मेट्रो शुरू होने पर मिलेगी बड़ी राहत
मेट्रो से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने के बाद भोपाल में ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की समस्या में काफी हद तक कमी आएगी। मेट्रो से शहरवासियों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन मिलेगा। हालांकि, बढ़ती लागत को लेकर आम लोगों में चर्चा जारी है।
अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @shabd_sanchi
- Twitter: shabdsanchi
