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भोपाल में साहित्य-कला का सबसे बड़ा उत्सव, 70 देशों के लोग शामिल, कहा हिन्दी माथे की बिंदी

Bhopal literature and art festival with participants from 70 countries celebrating HindiBhopal literature and art festival with participants from 70 countries celebrating Hindi

Bhopal Literature Festival | 70 देशों की भागीदारी | हिन्दी माथे की बिंदी

भोपाल। हिन्दी ऐसी भाषा है जिसके बिंदी से शब्द पूरा होता है, यू कहें कि हिन्दी लोकभाषा हमारे माथे की बिन्दी है। बिन्दी से शब्द को पढ़ा और लिखा जा सकता है। दरअसल शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में साहित्य और कला के सबसे बड़े उत्सव ‘विश्वरंग-2025 का आयोजन किया गया है।

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला के इस महोत्सव में देश-विदेश से आए साहित्यकारों, कलाकारों और युवाओं ने हिस्सा लिए हुए है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किए है। इस कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी को दुनिया भर में आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है, तो इस मंच के माध्यम से दुनिया भर के हिन्दी प्रेमियों को जोड़ने का काम किया जा रहा है और इसमें प्रतिवर्ष सफलता मिल रही है। जिसका उदाहरण है कि इसकी शुरूआत में 16 देश के लोग शामिल हुए थे आज 70 देश के लोग इसमें शामिल हो चुके है।

भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भाषा और संस्कृति एक-दूसरे की सहज पूरक हैं। संस्कृति, भाषा को वह कथा-बीज देती है, जिनसे लोक-साहित्य से लेकर वैश्विक साहित्य जन्म लेता है और भाषा, संस्कृति को वह अभिव्यक्ति देती है, जिससे परंपराएं पीढ़ियों तक सुरक्षित यात्रा कर पाती हैं। भाषा और संस्कृति दोनों एक-दूसरे की संरक्षक भी हैं।

साहित्य का एक ही रंग होता है, राग और आनंद का। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हिन्दी भाषा सच्चे अर्थों में लोक भाषा है। हिन्दी हमारे माथे की बिन्दी है।

70 देशों के साहित्य-कला के लोग शामिल

आज विश्वरंग के माध्यम से 70 देशों के साहित्यकार, कलाकार और संस्कृति संरक्षक भोपाल में शमिल हुए है। विश्वरंग फांउडेशन के संस्थापक और रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि विश्वरंग एक ऐसा आयोजन है, जिसकी शुरुआत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से हुई।

विश्वरंग के पहले आयोजन 2019 में केवल 16 देश शामिल थे, अब इसमें 70 से अधिक देश सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह सातवां आयोजन है। विश्वरंग में 40 देशों के 70 से अधिक साहित्यकार एवं पत्रकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन में 1000 से अधिक अतिथि आए हैं। विश्वरंग में 100 से अधिक हिंदी पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा।

ऐसा भी आयोजन

आयोजन में श्रीकृष्ण लीला मंचन भी आकर्षण का केंद्र है। यह आयोजन युवाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार प्राप्त करने में भी सहभागी बन रहा है। विश्वरंग में समाचार-पत्र, कला-संस्कृति एवं विज्ञान आधारित 7 अलग-अलग प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं। दुनिया के कई देशों में हिंदी को आगे बढ़ाने वाले साहित्यकार भारत आना चाहते हैं और सरकार के साथ मिलकर हिंदी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। वर्ष 2019 से 2024 तक, विश्वविद्यालय ने विश्वरंग के 6 भव्य और अविस्मरणीय आयोजन किए जो न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे विश्व में हिन्दी प्रेमियों को जोड़ने का अद्भुत प्रयास रहे हैं। विश्वरंग में 80 से अधिक सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ओलंपियाड में 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वरंग फांउडेशन को अब सरकार का साथ मिल रहा है और अब मध्यप्रदेश सरकार इस विशिष्ट महोत्सव को शासन की ओर से आयोजित करने की ओर कदम बढ़ा रही है।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में हिन्दी सेवी डॉ. सिद्धांत चतुर्वेदी, डॉ. अदिति चतुर्वेदी, डॉ. अरुण जोशी, राहुल कोठारी एवं अतिथि सहित विद्वतजन, दुनियाभर से आए रचनाकार, साहित्यकार, भाषाविद्, हिन्दी प्रेमी, साहित्य प्रेमी और कलाप्रेमी उपस्थित थे।

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