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Bhopal E-Bus Service: भोपाल में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत, पहले दिन 2 हजार यात्रियों ने किया सफर, तीन रूट पर दौड़ीं 10 ई-बसें

Bhopal E-Bus Service: भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में तीन प्रमुख रूटों पर 10 इलेक्ट्रिक बसों का नियमित संचालन शुरू हो गया है। पहले ही दिन करीब दो हजार यात्रियों ने इन बसों में सफर किया, जिसमें कोलार रूट पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। यात्रियों के लिए न्यूनतम किराया 7 रुपये और अधिकतम 40 रुपये तय किया गया है, जबकि वातानुकूलित (AC) सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। नई ई-बसों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, जिनमें दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए हाइड्रोलिक दरवाजे और सुरक्षा के लिहाज से छह सीसीटीवी निगरानी कैमरे (CCTV Cameras) लगाए गए हैं।

Bhopal E-Bus Service: राजधानी भोपाल में गुरुवार से सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देते हुए इलेक्ट्रिक बस सेवा (Electric Bus Service) की शुरुआत कर दी गई। टिकटिंग व्यवस्था और ट्रायल रन पूरा होने के बाद पहली बार इन बसों में नियमित यात्रियों ने सफर किया। पहले ही दिन करीब दो हजार लोगों ने ई-बसों का उपयोग किया। हालांकि नई सेवा की सीमित जानकारी और फिलहाल कम बसें उपलब्ध होने के कारण यात्री संख्या उम्मीद के मुकाबले कम रही।

तीन प्रमुख रूट पर शुरू हुई सेवा

पहले चरण में शहर के तीन प्रमुख मार्गों पर 10 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया है। ये बसें चिरायु अस्पताल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन, डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन से कोच फैक्टरी और बैरागढ़-चिचली से कोलार रूट पर चलाई जा रही हैं। इनमें कोलार और बैरागढ़-चिचली मार्ग पर सबसे अधिक यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई, जबकि कोच फैक्टरी रूट पर सामान्य भीड़ देखने को मिली।

पहले दिन अच्छी शुरुआत, बढ़ने की उम्मीद

सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक करीब 850 यात्रियों ने इलेक्ट्रिक बसों में सफर किया, जिससे लगभग 13 हजार रुपये की आय हुई। पूरे दिन यह आंकड़ा करीब दो हजार यात्रियों तक पहुंच गया। परिवहन अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे लोगों को नई सेवा की जानकारी मिलेगी, यात्रियों की संख्या और दैनिक आय दोनों में वृद्धि होगी। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में रोजाना 30 हजार रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता है।

फिलहाल शाम 7 बजे तक सेवा

नई ई-बसों की पहली बस सुबह 5:04 बजे बैरागढ़ डिपो से रवाना हुई। फिलहाल बसों का संचालन सुबह से शाम 7 बजे तक किया जा रहा है। व्यवस्था पूरी तरह स्थिर होने के बाद सेवा का समय बढ़ाकर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक करने की योजना है। संचालन फिलहाल दो शिफ्ट में किया जा रहा है, जिससे सभी रूट पर नियमित सेवा उपलब्ध कराई जा सके।

एसी बस, लेकिन किराया वही पुराना

इलेक्ट्रिक बसों में सफर करने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपये और अधिकतम 40 रुपये निर्धारित किया गया है, जो पहले से संचालित सिटी बसों के बराबर है। यात्रियों का कहना है कि एसी सुविधा के साथ आरामदायक सफर मिलने से यह सेवा लोगों के लिए बेहतर विकल्प साबित होगी।

पुराने बस स्टॉप से ही मिलेगी सुविधा

यात्रियों को नई बसों के लिए अलग बस स्टॉप तलाशने की जरूरत नहीं होगी। इलेक्ट्रिक बसें शहर के मौजूदा बस स्टॉप से ही संचालित की जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में भोपाल में सिटी बसों की संख्या काफी घट गई थी, ऐसे में नई ई-बसें सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।

100 में से 30 बसें पहुंचीं, फिलहाल 10 सड़क पर

भोपाल के लिए कुल 100 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी मिली है। इनमें से 30 बसें शहर पहुंच चुकी हैं, जबकि फिलहाल 10 बसों का व्यावसायिक संचालन शुरू किया गया है। अगले चरण में 10 और बसों को सेवा में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अगले 10 से 12 दिनों में 20 अतिरिक्त बसें भी भोपाल पहुंच सकती हैं। प्रदेश स्तर पर इस सेवा का औपचारिक शुभारंभ 15 अगस्त को प्रस्तावित है।

छोटी बसें, भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसान संचालन

नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है, जो पुरानी 12 मीटर लंबी सिटी बसों की तुलना में छोटी है। इससे संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बसों का संचालन और मोड़ना आसान होगा। हालांकि व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक जाम अब भी चुनौती बना रहेगा।

पहले दिन ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई परेशानी

सेवा के पहले दिन बोर्ड ऑफिस से कोच फैक्टरी मार्ग पर ट्रैफिक जाम का असर बसों की रफ्तार पर भी देखने को मिला। प्रभात चौराहे से रेलवे स्टेशन तक सामान्य तौर पर पांच मिनट में तय होने वाला सफर करीब 21 मिनट में पूरा हुआ। अधिकारियों के अनुसार अशोका गार्डन और पुष्पा नगर क्षेत्र में अतिक्रमण, सड़क किनारे पार्किंग और फुटपाथ पर बनी दुकानों की वजह से यातायात प्रभावित रहा।

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