Bhojshala Supreme Court Namaj: मध्य प्रदेश के धार जिला में स्थिति भोजशाला मंदिर (Bhojshala Mandir) का मामला एक बार फिर गरमा गया है. पिछले महीने ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ASI की (Bhojshala ASI Survey) सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानते हुए यहां हिन्दू पक्ष को पूजा अर्चना की अनुमति दे दी थी और नमाज पर रोक लगा दी थी. मगर अब सुप्रीम कोर्ट ने यहां नमाज के लिए भी मंजूरी देदी है जिससे एक बार फिर धार में तनाव का माहौल बन गया है.
दरअसल हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने और यहां हिन्दुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिए जाने के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट (Bhojshala Supreme Court) की तरफ रुख किया था और हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग उठाई थी. करीब एक महीने बाद हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर को नोटिस जारी करते हुए यह निर्देश दिए हैं कि भोजशाला मंदिर परिसर से सटे किसी खुले इलाके में नमाज के लिए जगह दी जाए, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को सिर्फ शुक्रवार की दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का ही समय दिया है.
दरअसल CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। हालांकि कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत नहीं देने के इंकार कर दिया, यानी यहां पहले जैसी व्यवस्था नहीं होगी जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज और निर्धारित दिनों में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। बहरहाल मुस्लिम पक्ष की मांग स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ASI कोर्ट की अनुमति के बिना भोजशाला में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगी।
बता दें कि कांग्रेस राज्यसभा सांसद और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मामले में मुस्लिम पक्ष की तरफ से अपना पक्ष रखा है. उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 के खिलाफ बताया है. वहीं केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या सामने नहीं आई और प्रशासन ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखा है।
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फैसला ASI की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सुनाया था, जिसमे यह साबित हुआ था कि भोजशाला एक मंदिर है. भोजशाला में ASI को 150 से ज्यादा संस्कृत और प्राकृतिक शिलालेख मिले हैं, जिनमे ‘सरस्वत्यै नमः’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ जैसे उल्लेख हैं. एक शिलालेश में पारिजातमंजरी-नाटिका का उल्लेख है जिसमे लिखा है- कि इस नाटक का मंचन “शारदा देवी के सदन में हुआ है. परिसर में 106 खंभे और 82 स्तंभ हैं जो देखने से ही पता चल जाते हैं कि यह मंदिर का हिस्सा हैं. इन्ही सब साक्ष्यों के आधार पर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हिन्दू पक्ष को भोजशाला में पूर्ण अधिकार मिला था.
अब इस मामले की जाँच और आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। सभी पक्षों की दलीलें, एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेख और कानूनी पहलुओं का परीक्षण होगा। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि मामले की अंतिम सुनवाई अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर की जा सकती है। इस फैसले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल भोजशाला विवाद तक सीमित नहीं, बल्कि काशी की ज्ञानवापी और संभल के मस्जिद-मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।

