धार। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला और धारेश्वर मंदिर परिसर का समग्र विकास करने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। सरस्वती लोक निर्माण के लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने तकनीकी सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। आधुनिक ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की मैपिंग की जा रही है, ताकि महाकाल लोक की तर्ज पर एक भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जा सके।
दो विभाग मिलकर कर रहे काम
धार की भोजशाला को नए तरीके से तैयार करने तथा इसे कॉरिडारे बनाने के लिए पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से प्रस्तावित सरस्वती लोक परियोजना के लिए विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण कराया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, संरचनात्मक जरूरतों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
आधुनिक ड्रोन कैमरों से मैपिंग
प्रारंभिक चरण में सर्वेक्षण दल ने धारेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण करके भोजशाला परिसर का तकनीकी सर्वे किया है। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की मैपिंग की गई, ताकि स्थल की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन हो सके। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह सब होगा
सरस्वती लोक और धारेश्वर लोक को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को मिलाकर एक एकीकृत धार्मिक और पर्यटन परिपथ बनाया जाएगा। राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट परिसर के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित करने के लिए धार में एक शोध संस्थान भी स्थापित किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने घोषित किया था मंदिर
ज्ञात हो कि धार में स्थित भोजशाला में मां बग्गा देवी, मां सरस्वती की अति प्रचीन प्रतिमा स्थापित है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मां सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर घोषित किया गया था। इस स्थल पर पहले मुस्लिम परिवार द्वारा अपना धार्मिक स्थल होने का दावा किया गया था। कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के बाद होईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर होने का आदेश देकर पूजा-अर्चना के लिए घोषित किया था। इसके बाद मध्यप्र्रदेश सरकार एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं भोजशाला पहुचे और उन्होने इस स्थल को विकसित करने का निणर्य लिए थें, जिसके बाद इस स्थल को अब नए तरीके से तैयार करने का काम शुरू हो गया है।

