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Bhaumvati Amavasya 2026 : मंगल दोष और पितृ दोष से मुक्ति का भौमवती अमावस्या पर दिव्य संयोग

Bhaumvati Amavasya 2026 : मंगल दोष और पितृ दोष से मुक्ति का भौमवती अमावस्या पर दिव्य संयोग –हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, किंतु जब यह तिथि मंगलवार (भौमवार) के दिन पड़ती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग लेकर आता है, जो न केवल पितरों की शांति के लिए बल्कि जीवन में आ रही मानसिक, आर्थिक और वैवाहिक समस्याओं के निवारण के लिए भी उत्तम माना गया है। यह पर्व दो महत्वपूर्ण शक्तियों का संगम है। एक ओर जहां यह पितरों (पूर्वजों) को तृप्त करने का दिन है, वहीं दूसरी ओर यह मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव (मंगल दोष) को शांत करने का सबसे कारगर उपाय भी प्रदान करता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, तर्पण और हनुमान उपासना से कुंडली में मौजूद मंगल दोष समाप्त होता है और पितृ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। भौमवती अमावस्या का महत्व, पूजा विधि और उपाय। जानें कैसे मंगलवार को पड़ने वाली यह अमावस्या पितृ दोष और मंगल दोष से मुक्ति दिलाकर जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

भौमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व

भौमवती अमावस्या केवल एक तिथि नहीं,बल्कि एक ऊर्जावान संयोग है। इस दिन का महत्व कई कारणों से विशेष है।

पितरों की तृप्ति का मोक्षदायी दिन-इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने से उन्हें अक्षय तृप्ति प्राप्त होती है। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

मंगल ग्रह के लिए शुभ-मंगलवार के दिन होने के कारण इस अमावस्या का सीधा संबंध मंगल ग्रह से है। यह दिन मंगल दोष (माँगलिक दोष) से पीड़ित जातकों के लिए रामबाण उपाय सिद्ध होता है।

हनुमान जी की विशेष कृपा-मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। ऐसे में अमावस्या पर हनुमान जी की विधिवत पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। इससे नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति मिलती है।

ऋण मुक्ति का उपाय-इस दिन ‘ऋणमोचक मंगल स्त्रोत’ का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। ऐसा करने से कर्ज के बोझ से दबे लोगों को राहत मिलती है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।

भौमवती अमावस्या पर क्या करें (उपाय)

इस पवित्र दिन का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त करने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
प्रातः स्नान और संकल्प-सूर्योदय से पूर्व जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पितरों की शांति के लिए संकल्प लें।
पितृ तर्पण और दीपदान-किसी पवित्र नदी या पीपल के वृक्ष के नीचे पितरों को जल (तर्पण) अर्पित करें। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पितरों से सुख-शांति की प्रार्थना करें।
हनुमान जी की पूजा-किसी हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली को सिंदूर, चोला और लाल पुष्प अर्पित करें। हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
विशेष पाठ-कर्ज से मुक्ति पाने के लिए “ऋणमोचक मंगल स्त्रोत्र” का पाठ अवश्य करें। यह उपाय मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को भी कम करता है।
दान का महत्व-इस दिन गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र या तांबे की किसी वस्तु का दान करना चाहिए। सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

संपूर्ण दोषों से सुरक्षित रहने कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानियां

तामसिक चीजों से बचें-इस दिन मांस, मदिरा,लहसुन-प्याज आदि तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें। यह पवित्रता की भावना को भंग करता है।
कलह से बचें-परिवार में किसी भी प्रकार का वाद-विवाद या कलह न करें। मन को शांत रखें और सात्विक विचारों में लीन रहें। नकारात्मक वार्तालाप से बचना चाहिए।

निष्कर्ष-भौमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग जीवन में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा, पितृ दोष और मंगल दोष को समाप्त करने की अपार क्षमता रखता है। यदि आपके जीवन में वैवाहिक समस्याएं, जमीन-जायदाद के विवाद या लगातार आर्थिक परेशानियाँ बनी रहती हैं, तो इस दिन किए गए पवित्र कर्म और उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। श्रद्धा, विश्वास और सही विधि से किए गए उपाय आपको मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की ओर अग्रसर करेंगे।

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