भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: हाईकोर्ट ने कहा सरकार का जवाब असंवेदनशील, क्रिमिनल जिम्मेदारी तय होगी

Bhagirathpura Contaminated Water News: इंदौर (Indore) के भागीरथपुरा (Bhagirathpura Contaminated Water) में नर्मदा जल (Narmada Water) के दूषित होने से मचा हड़कंप अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दूषित पानी कांड को “स्वच्छ पेयजल मौलिक अधिकार” बताते हुए सरकार और नगर निगम पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को “असंवेदनशील” करार दिया और अफसरों पर सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी दी।

अब तक 17 मौतें हो चुकी हैं। स्थानीय दावे और रिपोर्ट्स के अनुसार; सरकारी आंकड़ा कम है. कुल 421 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 311 डिस्चार्ज। अभी 110 मरीज भर्ती हैं, 15 ICU में। हाल में 38 नए केस सामने आए, 6 को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया।

कोर्ट ने मुद्दे को 7 कैटेगरी में बांटा – राहत, रोकथाम, जवाबदेही, अनुशासनात्मक कार्रवाई, मुआवजा, निर्देश और जागरूकता। 2017-18 की रिपोर्ट में इंदौर के 60 में से 59 सैंपल अनफिट थे, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। 2022 का नई पाइपलाइन प्रस्ताव फंडिंग इश्यू से अटका। दिसंबर 2025 के कोर्ट ऑर्डर के बावजूद शिकायतें अनदेखी की गईं। प्रभावित इलाकों में अभी भी दूषित पानी सप्लाई हो रही है।

हाईकोर्ट का एक्शन

  • प्रभावितों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का आदेश।
  • मौतों पर डिटेल रिपोर्ट मांगी।
  • राज्य सरकार और नगर निगम से नई स्टेटस रिपोर्ट।
  • अगली सुनवाई 15 जनवरी को, चीफ सेक्रेटरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर होने का निर्देश।
    कोर्ट ने कहा, “स्वच्छ पेयजल मौलिक अधिकार है (Article 21 के तहत), कोई समझौता नहीं चलेगा

कांग्रेस नेताओं – प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) और विपक्ष नेता उमंग सिंघार (Umang Singhar) – ने भागीरथपुरा का दौरा किया। मृतकों अशोक लाल पवार, जीवन लाल और गीता बाई के परिवारों से मिले। CM मोहन यादव (Mohan Yadav), मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और मेयर पुष्यमित्र भार्गव (Pushyamitra Bhargav) के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने फिर प्रदर्शन की योजना बनाई। पुलिस ने बैरिकेडिंग की, अधिकारियों से बहस हुई।

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