इंदौर जालकांड: सीएम यादव ने कमिश्नर को हटाया

Madhya Pradesh Chief Minister visiting a hospital patient during official inspection

इंदौर (Indore) के भागीरथपुरा (Bhagirathpura Contaminated Water) इलाके में नर्मदा जल (Narmada Water) की पाइपलाइन में लीकेज से सीवेज का गंदा पानी मिलने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अब तक दूषित पानी (Contaminated Water Indore) पीने से 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग उल्टी, दस्त और डायरिया से जूझते हुए अस्पतालों में भर्ती हैं।

यह घटना देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में हुई, जहां लोगों का नल के पानी से भरोसा पूरी तरह उठ गया है। लीकेज ठीक होने के दो दिन बाद भी लोग टैंकर का पानी ही इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे दुखद मामला 5 महीने के मासूम अव्यान साहू (Avyan Sahu) की मौत का है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

सीएम मोहन यादव का एक्शन

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Dr. Mohan Yadav) ने सख्त कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप कुमार यादव (Dilip Kumar Yadav) को हटा दिया है। उन्हें किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में उप सचिव बना दिया गया। साथ ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया (Rohit Sisonia) और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव (Sanjeev Srivastava) को निलंबित कर तीनों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।

सीएम यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि “भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना में सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं।

इसके अलावा इंदौर नगर निगम में तीन नए IAS अधिकारी आकाश सिंह (IAS Akash Singh), प्रखर सिंह (IAS Prakhar Singh) और आशीष पाठक (IAS Ashish Pathak) की नियुक्ति की गई है।

लापरवाही के आरोप

जांच में सामने आया कि कमिश्नर दिलीप यादव पर गंदे पानी की शिकायतों को अनदेखा करने और पाइपलाइन टेंडर की मॉनिटरिंग न करने के आरोप हैं। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने अगस्त 2025 में जारी टेंडर को महीनों रोके रखा, जबकि संजीव श्रीवास्तव ने भी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए

सीएम यादव ने प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई। उन्होंने साफ पेयजल सुनिश्चित करने, पानी की टंकियों की नियमित सफाई, 20 साल पुरानी पाइपलाइनों का चिन्हांकन और शिकायतों को इमरजेंसी मानकर 48 घंटे में हल करने के सख्त निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि “इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।”

पानी की सैंपल रिपोर्ट में खुलासा

इंदौर के सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी (Indore CMHO Dr. Madhav Prasad Hasani) ने बताया कि पानी पीने योग्य नहीं है। सैंपलों में फीकल कॉलिफॉर्म (Fecal Coliform), ई-कोलाई (E. Coli), विब्रियो कोलेरी (Vibrio Cholerae) और प्रोटोजोआ जैसे जानलेवा बैक्टीरिया मिले हैं, जो हैजा (Cholera) फैला सकते हैं।

भागीरथपुरा में अभी भी सैकड़ों मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, कई की हालत गंभीर है। कई परिवारों से माता-पिता या कमाने वाले का साया उठ गया। लोग निगम और नल के पानी से पूरी तरह निराश हैं। यह त्रासदी उस शहर में हुई जहां लगातार 8 बार स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) में नंबर-1 रहा।

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