Bernstein report on Nifty 50 returns outlook for 2026 में भारतीय शेयर बाजार को लेकर सतर्क अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन के चलते 2026 के अंत तक निफ्टी 50 से सीमित रिटर्न मिलने की संभावना है, भले ही कॉरपोरेट कमाई में स्थिर वृद्धि बनी रहे।
रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या है
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने कहा है कि भारत 2026 में दुनिया के सबसे महंगे इक्विटी बाजारों में शामिल रहेगा। इसी वजह से Nifty 50 से मिलने वाले रिटर्न सीमित रह सकते हैं। रिपोर्ट में 2026 के अंत तक निफ्टी के लिए लगभग 7.6 प्रतिशत रिटर्न का अनुमान दिया गया है।
Bernstein report on Nifty 50 returns outlook for 2026: टारगेट कैसे तय हुआ
Bernstein ने अपने अनुमान में मान लिया है कि FY28 तक निफ्टी कंपनियों की कमाई करीब 13.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगी। इसके आधार पर दो साल आगे की अनुमानित कमाई पर 19 गुना P/E लगाया गया है। इस गणना से निफ्टी 50 का लक्ष्य 28,100 तय किया गया है, जिसे रिपोर्ट ने सीमित बढ़त वाला स्तर बताया है।
मौजूदा स्तर से तुलना क्यों अहम
2025 के अंत में निफ्टी करीब 26,150 के आसपास था और उस समय यह एक साल आगे की कमाई के मुकाबले 20 से ज्यादा P/E पर कारोबार कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, इतनी ऊंची वैल्यूएशन पर बाजार में तेजी की गुंजाइश घट जाती है। यही कारण है कि 2026 में रिटर्न, 2025 के मुकाबले कम रहने का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक बाजारों से तुलना
Bernstein की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का बाजार दुनिया की 15 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के औसत से काफी महंगा है। जहां इन देशों का औसत P/E लगभग 15 के आसपास है, वहीं भारत 20 से ऊपर ट्रेड कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इतिहास में ऐसे दौर में सस्ते बाजारों ने महंगे बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

नकारात्मक स्थिति में क्या जोखिम हैं
रिपोर्ट ने संभावित जोखिमों की भी चर्चा की है। अगर आने वाले दो वर्षों में कमाई की वृद्धि घटकर 8 प्रतिशत रह जाती है और वैल्यूएशन मल्टीपल 18.5 तक फिसलता है, तो निफ्टी 50 का स्तर 24,800 तक आ सकता है। इसका मतलब मौजूदा स्तर से लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है।
निवेशकों के लिए संकेत
इस आउटलुक के आधार पर Bernstein ने भारत को लेकर अपना रुख “न्यूट्रल” कर दिया है। रिपोर्ट का संकेत है कि 2026 में इंडेक्स-आधारित निवेश से बहुत ऊंचे रिटर्न की उम्मीद करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे माहौल में स्टॉक-विशेष रणनीति और जोखिम प्रबंधन अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
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