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‘भारत से हमें जबरदस्त समर्थन’, Benjamin Netanyahu का JD वेंस को करारा जवाब, अमेरिका इकलौता नहीं

Benjamin NetanyahuBenjamin Netanyahu

वैश्विक राजनीति और कूटनीति के मंच से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के उस बयान पर बेहद तीखा और करारा पलटवार किया है, जिसमें वेंस ने दावा किया था कि पूरी दुनिया में अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र शक्तिशाली मददगार बचा है।

नेतन्याहू ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘फॉक्स न्यूज’ (Fox News) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अमेरिकी प्रशासन को आईना दिखाते हुए न सिर्फ इस दावे को खारिज किया, बल्कि दुनिया के सामने भारत के साथ इजरायल की अटूट और गहरी दोस्ती का खुलकर ऐलान कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री ने बेहद गर्व के साथ कहा कि दुनिया में इजरायल अकेला नहीं है, बल्कि 1.4 अरब (140 करोड़) की आबादी वाला भारत उसके साथ मजबूती से खड़ा है और वहां से इजरायल को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है।

क्या है पूरा विवाद? जेडी वेंस ने कैबिनेट ब्रीफिंग में क्या कहा था?

इस पूरे कूटनीतिक घमासान की शुरुआत वाशिंगटन में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग से हुई। दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) को लेकर बातचीत चल रही है। इजरायल की वर्तमान सरकार और वहां की कैबिनेट इस समझौते से खुश नहीं है और लगातार अमेरिकी रुख की आलोचना कर रही है।

1. यूएस-ईरान शांति समझौता और इजरायल की आपत्ति

इजरायल का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी तरह की नरमी बरतना मिडिल ईस्ट (Middle East) में उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। इस बात को लेकर इजरायली कैबिनेट के कुछ मंत्रियों ने खुलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन की नीतियों की आलोचना की थी।

2. जेडी वेंस का ‘एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी’ वाला दावा

इजरायल की इसी तीखी बयानबाजी से नाराज होकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस की एक ब्रीफिंग के दौरान इजरायल को चेतावनी भरे लहजे में नसीहत दे डाली। वेंस ने कहा:

“अगर मैं इजरायल सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं दुनिया में बचे अपने इकलौते शक्तिशाली सहयोगी (अमेरिका) पर इस तरह के हमले या आलोचना कभी नहीं करता। पूरे विश्व में अमेरिका ही एकमात्र ऐसा देश है जो इस समय इजरायल के पीछे मजबूती से खड़ा है और उसके सैन्य अभियानों की फंडिंग कर रहा है।”

जेडी वेंस का यह बयान सीधे तौर पर इजरायल के आत्मसम्मान और उसकी वैश्विक साख पर चोट करने जैसा था, जिसका जवाब देने के लिए खुद बेंजामिन नेतन्याहू सामने आए।

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बेंजामिन नेतन्याहू का चुटीला अंदाज: ‘भारत जैसा एक छोटा सा देश’

फॉक्स न्यूज संडे ब्रीफिंग में जब एंकर ने नेतन्याहू से जेडी वेंस की इस टिप्पणी पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी, तो इजरायली प्रधानमंत्री ने बेहद सधे हुए लेकिन चुटीले अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि वह जेडी वेंस का निजी तौर पर सम्मान करते हैं, लेकिन उनके इस दावे से रत्ती भर भी सहमत नहीं हैं कि इजरायल का दुनिया में कोई दूसरा दोस्त नहीं है।

नेतन्याहू ने मुस्कुराते हुए कहा:

“मैं जेडी वेंस का बहुत सम्मान करता हूं, हमारे रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं उनकी हर बात मान लूं। हमारे पास दुनिया में कुछ अन्य बहुत मजबूत दोस्त भी हैं। उदाहरण के लिए, एक ‘छोटा सा देश’ है जिसे भारत कहा जाता है… आप तो जानते ही हैं, जिसकी आबादी लगभग 1.4 अरब है! भाई, हमें वहां से जो जबरदस्त और अद्भुत समर्थन मिलता है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।”

1. 1.4 अरब भारतीयों का सोशल मीडिया और फेसबुक सपोर्ट

नेतन्याहू यहीं नहीं रुके, उन्होंने डिजिटल कूटनीति का जिक्र करते हुए कहा कि जमीन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी भारत के लोग इजरायल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “आप जानते हैं, मेरे पास फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया हैंडल हैं। जब मैं वहां देखता हूं, तो भारतीय नेटिजन्स (Indian Users) की तरफ से मिलने वाला समर्थन अविश्वसनीय और भारी मात्रा में होता है। हमारे पास समर्थकों की कोई कमी नहीं है।”

2. पीएम नरेंद्र मोदी और नेतन्याहू की मजबूत केमिस्ट्री

बेंजामिन नेतन्याहू का यह बयान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंधों की गहराई को भी दर्शाता है। पिछले एक दशक में भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। नेतन्याहू कई बार सार्वजनिक मंचों से पीएम मोदी को अपना ‘सच्चा और अजीज दोस्त’ बता चुके हैं।

कूटनीतिक चश्मे से समझें: नेतन्याहू ने क्यों लिया भारत का नाम?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा जेडी वेंस को जवाब देने के लिए विशेष रूप से भारत का नाम चुनना एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है कि वैश्विक मंच पर भारत का नाम लेना अमेरिका के लिए कितना बड़ा कूटनीतिक संदेश है:

कूटनीतिक कारक (Diplomatic Factor)अमेरिका का नजरिया (US Perspective)इजरायल का पलटवार (Israel’s Counter)
वैश्विक निर्भरताअमेरिका सोचता है कि इजरायल हथियारों और फंडिंग के लिए पूरी तरह उसी पर आश्रित है।नेतन्याहू ने दिखाया कि भारत जैसी उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति (Global Power) इजरायल की रणनीतिक साझेदार है।
जनसांख्यिकीय ताकतअमेरिका अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत के घमंड में था।नेतन्याहू ने 140 करोड़ की आबादी वाले देश का जनसमर्थन दिखाकर वाशिंगटन को कड़ा संदेश दिया।
गुटनिरपेक्ष कूटनीतिअमेरिका चाहता है कि इजरायल उसकी हर विदेश नीति (जैसे ईरान डील) का आंख बंद करके समर्थन करे।इजरायल ने साफ किया कि भारत की तरह उसकी भी स्वतंत्र विदेश नीति है और वह अपने फैसले खुद ले सकता है।

अमेरिका इकलौता नहीं: साइबर तकनीक और एआई में इजरायल का डंका

अपने इंटरव्यू के अंत में इजरायली प्रधानमंत्री ने साफ किया कि आज की दुनिया में कोई भी देश किसी पर एकतरफा उपकार नहीं करता, बल्कि रिश्ते आपसी हितों और तकनीकी ताकत पर टिके होते हैं।

नेतन्याहू ने गर्व से याद दिलाया कि इजरायल साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और उन्नत देश है। उन्होंने कहा:

“दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेता मुझे व्यक्तिगत रूप से फोन करते हैं। वे मुझसे कहते हैं कि ‘भले ही हमारे देश में पब्लिक ओपिनियन या राजनीतिक दबाव के कारण हमें कुछ दिक्कतें हों, लेकिन हम दिल से आपके साथ हैं। क्या हम कोई बिजनेस डील कर सकते हैं? क्या आपकी सेना हमें कुछ गुर सिखा सकती है? क्या हमें इजरायल की एआई और साइबर विशेषज्ञता मिल सकती है?’ इसलिए कूटनीति में पर्दे के पीछे के रिश्ते वैसे नहीं होते जैसे वे ऊपर से दिखाई देते हैं।”

FAQs – बेंजामिन नेतन्याहू और जेडी वेंस विवाद से जुड़े अहम सवाल

प्रश्न 1: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को लेकर क्या विवादास्पद बयान दिया था?

उत्तर: जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही पूरी दुनिया में इजरायल का एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी बचा है, इसलिए इजरायली कैबिनेट को ईरान के साथ अमेरिकी शांति समझौते की आलोचना करने के बजाय अमेरिका का सम्मान करना चाहिए।

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प्रश्न 2: बेंजामिन नेतन्याहू ने जेडी वेंस को जवाब देते हुए भारत का जिक्र किस तरह किया?

उत्तर: नेतन्याहू ने तंज कसते हुए भारत को ‘1.4 अरब आबादी वाला छोटा सा देश’ कहा और बताया कि इजरायल को भारत के लोगों और वहां की सरकार से कूटनीतिक व सोशल मीडिया (फेसबुक) पर जबरदस्त और अटूट समर्थन मिलता है।

प्रश्न 3: क्या अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध खराब हो रहे हैं?

उत्तर: दोनों देशों के बीच ईरान नीति और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल को लेकर कुछ कूटनीतिक मतभेद जरूर उभर कर सामने आए हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग अभी भी जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बेंजामिन नेतन्याहू का जेडी वेंस को दिया गया यह करारा जवाब वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है। यह बयान साबित करता है कि आज का इजरायल केवल पश्चिमी देशों या वाशिंगटन के इशारों पर चलने को मजबूर नहीं है।

भारत का खुलकर नाम लेकर नेतन्याहू ने न केवल नई दिल्ली की बढ़ती वैश्विक साख और कूटनीतिक वजन को स्वीकार किया है, बल्कि अमेरिका को यह भी समझा दिया है कि एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में इजरायल के पास भारत जैसे विश्वसनीय और शक्तिशाली मित्रों का एक बड़ा सुरक्षा कवच मौजूद है। आने वाले समय में भारत-इजरायल और अमेरिका के यह त्रिकोणीय संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीति को एक नया मोड़ दे सकते हैं।

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