नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह तय कर दिए हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है।
इस फैसले के बाद दोनों गुट अब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे।
पुराने नाम और चिन्ह पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक
तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद के बाद दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया था। दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे थे।
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पुराने चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे गए। अब आयोग ने दोनों के लिए अलग-अलग नाम और चिन्ह तय कर दिए हैं।
यह व्यवस्था फिलहाल चुनावी प्रक्रिया के लिए की गई है। दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठन और पुराने चुनाव चिन्ह पर मूल विवाद का अंतिम निपटारा अलग प्रक्रिया का विषय है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में आमने-सामने दोनों गुट
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। दोनों सीटों पर तृणमूल के दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं बागी गुट की ओर से नंदीग्राम में एतेशामुल हक और रेजीनगर में सफीउज्जमान शेख मैदान में हैं। चुनाव आयोग के ताजा आदेश में इन उम्मीदवारों को नए नाम और चुनाव चिन्ह से जोड़कर चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है।
नामांकन में भी पैदा हो गई थी मुश्किल
दोनों गुटों ने पहले अपने उम्मीदवारों का नामांकन तृणमूल कांग्रेस के नाम से कराया था। चूंकि दोनों पक्ष एक ही पार्टी और एक ही चुनाव चिन्ह का दावा कर रहे थे, इसलिए नामांकन की प्रक्रिया में स्थिति उलझ गई थी।
रेजीनगर में दोनों गुटों के उम्मीदवारों ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का अधिकृत उम्मीदवार बताया था। नंदीग्राम में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी।
चुनाव आयोग ने इसी समस्या को देखते हुए दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए, ताकि मतपत्र या ईवीएम पर उम्मीदवारों की पहचान को लेकर भ्रम न रहे।
2026 विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा विवाद
तृणमूल कांग्रेस में यह विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तेज हुआ। इसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए।
एक तरफ ममता बनर्जी का गुट पार्टी के मौजूदा संगठन और नाम पर अपना अधिकार बता रहा है। दूसरी तरफ बागी गुट ने भी चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया है।
अब उपचुनाव में दोनों गुटों की पहचान अलग होगी। ममता गुट ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से फुटबॉल खिलाड़ी चिन्ह के साथ चुनाव लड़ेगा, जबकि दूसरा गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से लिफाफा चिन्ह के साथ मैदान में होगा।

