Banda JE Couple Crime : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अमेरिका की एपिस्टिन फ़ाइल जैसा कांड का खुलासा हुआ है। यहाँ एक दंपति मासूम बच्चों के साथ दरिंदगी का खेल खेल खेला। JE पति और उसकी पत्नी मिलकर बच्चों को फंसा 679 बच्चों की अश्लील तस्वीरों और वीडियो पोर्न साइट पर बेचा। इसके साथ ही 50 से ज्यादा बच्चों के साथ यौन शोषण किया। इनमें बच्चों की उम्र ज्यादातर 5 साल से 16 साल की थी। इस शर्मनाक घटना का खुलासा साल 2020 में हुआ।
50 से ज्यादा बच्चों के साथ किया यौन शोषण
मासूमों के साथ हैवानियत की हदें पार करने वाला आरोपी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती हैं, जो भरोसे को हथियार बनाकर मासूम बच्चों को अपने जाल में फंसाता था और उन्हें बेचकर उनका यौन शोषण करता था। इस दंपति ने 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचें। अब पांच साल के बाद अदालत ने इस दंपति को फांसी की सजा सुना दी है।
साल 2020 में सामने आया ये मामला
बता दें कि साल 2020 में जब सीबीआई की जांच में ये मामला पहली बार आया तो सिर्फ बाल यौन शोषण का केस नहीं निकला, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश हुआ था। इनके संपर्क एक लंबे नेटवर्क में थे। ये पोर्न साइट पर बच्चों को बेचते थे और इनका यौन शोषण करवाते थे।
समाज में किस भेष में रहता था रामभवन?
आरोपी रामभवन दिखने में बिल्कुल साधारण आदमी लगता था। सिंचाई विभाग में जेई पद पर सरकारी नौकरी करता था। स्वाभाव से कम बोलने वाला था। वह हमेशा किराये के मकान में रहता था। पड़ोसियों से भी ज्यादा मेलजोल नहीं था। रामभवन की पत्नी दुर्गावती भी चुपचाप और शांत स्वभाव कि थी। शादी के कई साल बाद भी दोनों को कोई बच्चा नहीं हुआ था। लेकिन दोनों ने कमरे के भीतर एक खौफनाक अपराध की दुनिया बना रखी थी।
कैसे फंसाते थे मासूम बच्चे?
आरोपी रामभवन अपनी अपराध की दुनिया का मालिक था और उसकी इतनी उसके लिए छोटे बच्चों को फंसा कर उसके पास लाती थी। दुर्गावती ने पहले अपने आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया, जिनमें 5 से 16 साल उम्र के बच्चे शामिल थे। वह बच्चों को महंगा मोबाइल, घड़ी और चॉकलेट देकर जाल में फंसाती थी। लालच में फंसकर बच्चे उसके घर आने लगे और यौन शोषण का शिकार होने लगे।
हवस से बड़ा था पैसों का लालच
रामभवन का उद्देश्य बच्चों के साथ हवस को मिटाना हो था बल्कि बच्चों की अश्लील वीडियो बेचकर पैसे कमाना था। दोनों पति पत्नी केवल पैसों के भूखे थे। उसने इस अपराध को भी कारोबार बना दिया था। घर के अंदर बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते थे और फिर उन फाइलों पोर्न वैबसाइट पर भेची जाती थी। वह डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के जरिए इन वीडियो को बेचता था।
ईमेल से खुले अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क के तार
आरोपी रामभवन के ईमेल की जांच की गई तो सामने आया कि वह देश-विदेश के कई गिरोहों के संपर्क में था। जाँच में सामने आया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा संगठित अपराध था। यहीं नहीं यौन शोषण का शिकार अगर कोई बच्चा किसी तरह का विरोध करता तो उसे उन्हीं तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता था। साथ ही परिवारों को भी धमकी दी जाती थी। इस तरह खामोशी में इस अपराध के कई साल बीत गए।
इंटरपोल से आया पहला संकेत
17 अक्टूबर 2020 को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक चौंकाने वाली सूचना मिली। यह सूचना अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से आई थी। एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरें थीं। डिजिटल ट्रैकिंग से पता चला कि इनका स्रोत बुंदेलखंड का एक सरकारी इंजीनियर है। 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ। जांच की कमान डीएसपी अमित कुमार को सौंपी गई। अब तक जो अंधेरा घर की चारदीवारी में छुपा था, वह जांच की रोशनी में आने लगा।
16 नवंबर 2020 को गिरफ्तार हुए आरोपी
16 नवंबर 2020 को इस पूरे मामले से परदा हट गया। चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी को सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने चुपचाप घेर लिया। दरवाजा खुला तो अंदर जो मिला, उसने जांच अधिकारियों तक को हिला दिया। 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सेक्स टॉयज, 8 लाख रुपये नकद और डिजिटल फोल्डरों में छुपी 66 वीडियो और 600 से ज्यादा तस्वीरें। कुछ ही दिनों बाद दुर्गावती भी गिरफ्तार कर ली गई।
20 फरवरी 2026 को आरोपी दंपति को मिली फांसी की सजा
20 फरवरी 2026 का सबसे ज्यादा दिन अहम था। इसी दिन इन मासूमों को न्याय मिला। बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में 163 पन्नों का फैसला पढ़ा गया। जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने दोनों दोषियों को मौत होने तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई। वहीं, हर पीड़ित बच्चे को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने को कहा। राज्य और केंद्र सरकार को 10-10 लाख रुपये सहायता देने का आदेश दिया। फैसले के समय कोर्ट में सन्नाटा था। यह केवल सजा नहीं थी। यह समाज की ओर से एक संदेश था कि मासूमियत के खिलाफ अपराध को बख्शा नहीं जाएगा
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