Bagheli Ukhan: अपने इहन बघेलखंड मा एकठे उक्खान खूब चलत हय, कहा जात हय-“पढ़ाए पढ़य ना खूसड़, नबाए नबय ना मूसर” माने खूसड़ का केत्तउ पढ़ाबय उया सीखत पढ़त नहीं आय, अउर मूसर का केत्तउ टेढ़काबय उया नीचे सीधेन सीध गिरत हय। अब खूसड़ अउर मूसर दुनहुँ के मतलब अपना पन्चे जनतय होब, खूसड़ उल्लू के जाति के एकठे पक्षी होत हय जउन अपने इहन बघेलखंड मा मिलत हें अउर मूसर जउने से मनई चाउर कूटत अउर छरत हें। दरसल इया उक्खान तब मनई कहत हय, जब कोहु का केत्तउ समझाबै, केत्तउ सिखाबय-पढ़ाबय, उया नही समझय अउर न अपने मन के जबरपेलई करत हय अउर कुछु समझय का तैयार नहीं होत हय।
बघेली उक्खान की कहानी | Bagheli Ukhan
इया उक्खान से संबंधित एकठे कहानी इहन चलत ही, कहा जात हय बहुत पहिले अपने विंध्यक्षेत्र के बघेलखंड के कउनउ गाँव मा एकठे लड़िका अपने महतारी के साथ रहबा करय, रिमहाई भाषा मा बोलय ता लड़िका थोरका मोट अकिल के रहा, मोट अकिल के मतलब ता अपना पंचे सबय कोउ समझत होब। एहिन से ओकर काजउ ना होय, जहंय कजहा आमयं, ता उनके सउहें कुछु ऊटपटाँग बोल देय के कउनउ अइसन हरकत कई देय ता कजहा बिचिक जांय। ओखर महतारी हमेशा इहय चिंता मा रहय, कबअइ अउर कइसन के एखर काज होई, उया खूब देवी-देउतन का मनाबय। खैर कइसउ के महतारी जोर-जुगाड़ लगाई के ओखर काज करबाइस, ओखर मेहेरिया हुसियार रही, लेकिन काजे से पहिले उया बपुरी नही जानिस, के इया मोटअकिला हय। लेकिन बाद मा अपने महतारी-बाप के समझाए ढाड़स बांधिस के चला एखा हम सिखाय-समझाय डारब। अब एंकई का भा के महतारी लड़िका के काज होय का गंगा नहाय का माने रहि, ता उया अपने पुतऊ का सब समझाइस-बुझाइस अउर गंगा नहाय चली गय।
अब एक दिन का भा, लड़िकउना का एक दिन एक थे चोटाहिल खूसड़ मने उल्लू मिली गा, उया ओखा बड़ी मुश्किल से लईआबा और मरहम पट्टी किहिस, अब उया खूसट ओहिन के अंगना के पेड़ मा रहय लाग। ओखर मेहेरिया एकदिन कहिस इया खूसड़ का छोड़ि दा, एखा अब दूर भगाय दा, एखा नहीं पाला जाय, दोख होत हय। इया कुछु काम के नही होय, ना एही सिखाबय-पढ़ाबा जाय सकय। ता उया अपने मेहेरिया से कहिस हए तंय बड़ी हुसियार, गाँव में कईउ जन सुआ-कबूतर पाले हें, ता जब सुआ पाला जाय सकत हय, कबूतर पाला जाय सकत हय, ता खूसड़ काहे नहीं। हम एखा पालब अउर सिखाउब-पढ़ाउब, देखित हे इया कइसन नहीं सीखय। इहय कहिके उया खूसट का पकड़ के पिंजरा मा बेड़ लिहिस अउर ओखा सबेरे से सिखाबय-पढ़ायब लाग, जइसा मनई सुआ का सिखाबत हय। अब उया खूसटय आय, काहे सीखे पाबय, ओखर मेहरिया देखय अउर देखि-देखि चौआय, पय बिचारि करि कुछु ना पाबय, हालांकि उया रोकय अउर समझाबय की कोशिश करय अउर कहय जइसन इया मूसर का देखता हया एही ऊपर लई जाय के मनई एखा केत्तउ टेढ़काबय, लेकिन नीचे आबत आबत इया सीधेन-सीध गिरत हय, देखा एही मोड़ नहीं सकय मनई, अइसय इया खूसड़ होत हय, इया ना सीखी, तू एखर मरहम पट्टी करे रहा हय एहिन से इया तोहसे डेरात अउर भागत नही आय, इया सुनि के उया अउ खिसियान अउर बिगड़ के अपने मेहेरिया से कहिस तयं बाऊर हये चुप्प रहु। उया बेचारी चुप्प होइगय अउर मनय-मन बरबराय लाग, होइगा तूहुँ मनई के रूप मा खूसटय आह्या, काहे का मनबय। अउ इहय बरबरात उया अंगना मा बइठ के चाउर छरय लाग।
अउर उया लड़िकउना अंगना मा बइठ के उहय खूसड़ का पिंजरा मा बेड़े सिखाबत रहय, अब उया खूसड़ काहे का पढ़य, अउर खूसड़ ना पढ़य ता लड़िका खिसियाय, अउर पिंजरा मा एकठे लकड़ी से मारय, ता उया खूसड़ एहिन से खूब चिल्लाय अउर सीटी मारय। अब खूसड़ जंगली पक्षी, उया पिंजरा मा बेड़ड़े-बेड़ड़े खिसियाय अउर चिल्लाय, अब खूसट के चिल्लाय दोख माना जात हय, जब बहुत देर तक अइसनय होय लाग ता उया खूसट का पिंजरा से निकालिस।
अब खूसड़ त रहा जंगली पक्षी, उया इहय मउके के इंतजार मा रहा। पिंजरा खोलतय उया फरफराय के उड़ा, अब चूंकि खूसट का दिने मा जादा नही देखय। ता उया भड़भड़ाय के उड़ा घरे के भीतर कई चला गा, ओखे पीछेन पीछे उया लड़िकउना भगा, खूसड़ उहनउ से निकला अउर खसखसाऊँहा ओखे मुँहे मा पंजा मार दिहीस अउर उड़ी भाग, पंजा के चोट से घायल होइके लड़िकउना गोहार मारय लाग, ओखर किलिल सुनि-सुनि के आस-परोस के कइयू जन आय गें, लड़िका पिंजरा हाथ मा लइके खूनियान खड़ा रहय अउर ओखर मेहरिया चाउर छरय छोड़ि के मूसर लइके चौआय के देखय रहय। ऊँ दुनहुँ परानी के इया भेष देखि के लोग मजाक मा पूछय लागे, का होइगा, कइसा फलाने, काहे खूनियान हय, कहउँ मलकिन मूसर-ऊसर ता नहीं मारिस, महतारी घरे मा नही आय ता इया का आय मचाए हय तू पन्चे। इया सुनि फलाने ता रोबत रहें कुछु नहीं बोलिन, लेकिन फलाने के मलकिन सब बताबयं लागीं उनकर सब हाल करतूत। उनकर इया हाल सुनि के गाँव के कुछु लोग कहय लागे, एखर कोहु पहिले मरहम पट्टी करबाबा अउर न रे बइकल खूसड़ कबहूँ पढ़ाए-पढ़ा हय, उया जंगली शिकारी पक्षी होत हय, ओका ना पाल सकय मनई और ना पिंजड़ा मा बेड़ि सकय। ना उया कुछु सब्जी-भाजी, अनाज-दाना खात आय, कीड़ा मकोड़ा खात हय एहिन से एखा असुर के जात भुतहा-परेतहा अउर दोखि मानत हें, इया सुनि के उया ता कुछु ना बोल, लेकिन ओखर मेहेरिया कहय लाग अरे हम ता इनखा समझाबत रहन के जइसन मूसर का ऊपर उठाय के केतनउ टेढ़काबय उया नीचे, सीधेन-सीध गिरत हय। लेकिन जब ईं मानयं तब ना, ओखर इया बात सुनि के गाँव के एकजन सयान कहय लागे, इया ता उहय बात होइगय दादू- “पढ़ाए पढ़य ना खूसड़, नबाए नबय ना मूसर”। ता दादू तुहुँ मूसर अउर खूसड़य जइसन हया, तोहंयु का सिखाबय और पढ़ाबय बेकार हय। अब उया लड़िका केत्ता जानिस समझिस भगवान जानयं, लेकिन खूसड़ से चोटाहिल होइके थोर का अकिल ता आइन होइ ओखे। अबहिनेउ अपने समाज मा मूसर अउर खूसड़ जईसन बहुत से लोग मिल जात हें, जिनका समझाबय व्यर्थ हय, ऊँ उल्टा समझाबय बालेन का समझाय देत हें अउर जादा समझाबय ता गर्राय लागत हें।
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