Bagheli Kavi Sammelan Rewa : बघेली और हिंदी कविताओं से सजा कवि सम्मेलन,रचनाकारों ने बांधा समां-रीवा। विंध्य अंचल की समृद्ध लोक-संस्कृति और साहित्यिक परंपरा को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कवि सम्मेलन का आयोजन रायपुर कर्चुलियान के नाइन मोड़ पर किया गया। जिला मुख्यालय रीवा से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित इस आयोजन में बघेली और हिंदी कविताओं की शानदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समाजसेवी अशोक सिंह एवं शशिलता सिंह द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विंध्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से सामाजिक सरोकारों, व्यंग्य और संवेदनाओं का प्रभावशाली संगम प्रस्तुत किया। रीवा के रायपुर कर्चुलियान में आयोजित कवि सम्मेलन में बघेली व हिंदी कविताओं की शानदार प्रस्तुति, रचनाकारों ने समाजिक मुद्दों पर व्यंग्य से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध।
कविताओं से सजी साहित्यिक संध्या
कार्यक्रम में बघेली कवि रामलखन सिंह बघेल (महगना), प्रसिद्ध हास्य कवि एवं मंच संचालक आशीष तिवारी ‘निर्मल’, तथा कवयित्री सुलेखा पटेल ने एक से बढ़कर एक बघेली एवं हिंदी कविताएं प्रस्तुत कीं। कवियों की ओजस्वी, हास्य और व्यंग्य से भरपूर रचनाओं ने श्रोताओं को देर तक तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कविताओं के माध्यम से समाज की विसंगतियों, सामाजिक विद्रूपताओं और वर्तमान जीवन की चुनौतियों पर तीखे लेकिन संवेदनशील व्यंग्य प्रस्तुत किए गए, जिससे श्रोताओं को न केवल मनोरंजन मिला बल्कि सोचने की नई दिशा भी मिली।
रचनाकारों का सम्मान, साहित्य की भूमिका पर जोर
इस अवसर पर आयोजक अशोक सिंह एवं शशिलता सिंह ने सभी कवियों और रचनाकारों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज के दर्पण होते हैं, जो अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को नई सोच, दिशा और ऊर्जा प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों से लोकभाषा बघेली और हिंदी साहित्य को नई पहचान मिलती है।
बड़ी संख्या में श्रोताओं की रही सहभागिता
कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र सिंह,मनोज सिंह,अवधराज सिंह,तरुण सिंह,आनंद सिंह,आस्था सिंह,आराध्या सिंह,अनी सिंह,आशा सिंह, अमृता सिंह, सुषमा सिंह, अनुराग सोनी सहित सैकड़ों की संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और साहित्यिक रस का वातावरण बना रहा।
निष्कर्ष-यह कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकभाषा बघेली और हिंदी साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं और समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करते हैं।

