Site iconSite icon SHABD SANCHI

Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar : युवा जागरूकता से संभव है”बाल-विवाह मुक्त भारत” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी

Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar-Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar-

Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar-युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही बाल विवाह जैसी कुरीति को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है।

Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar : युवा जागरूकता से संभव है”बाल-विवाह मुक्त भारत” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी-रीवा। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने के लिए युवाओं में जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। इसी दृष्टिकोण के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल के निर्देशन में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के समाज कार्य अध्ययन केन्द्र में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी, को जागरूक करना था। विभिन्न विद्वानों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सक्रिय उपस्थिति ने इस संगोष्ठी को सार्थक एवं प्रभावशाली बना दिया। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में बाल विवाह उन्मूलन पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन। प्रो. अखिलेश शुक्ल ने युवा जागरूकता को बाल विवाह मुक्त भारत की कुंजी बताया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मुख्य वक्ता का प्रेरक उद्बोधन-

Keynote Speaker’s Inspiring Address

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर अखिलेश शुक्ल (प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा) ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि बाल विवाह केवल एक परंपरागत कुरीति नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और मानसिक स्तर पर देश की प्रगति में बाधक सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक युवा स्वयं इस अभियान का नेतृत्व नहीं करेंगे, तब तक बाल विवाह मुक्त भारत का सपना अधूरा रहेगा। प्रो. शुक्ल ने उपस्थित विद्यार्थियों से अपने-अपने पड़ोस, गाँव, जिला एवं प्रदेश स्तर पर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उनका प्रभावशाली और प्रेरणादायी उद्बोधन सभी के दिलों को छू गया।

मुख्य अतिथि का संदेश-Message from the Chief Guest

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. महानंद द्विवेदी (विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा) ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह असमानता और अशिक्षा की जड़ से पनपता है। इसे समाप्त करने के लिए युवाओं को आगे आकर सतत जागरूकता अभियान चलाने होंगे। उन्होंने सभी शिक्षकों और समाजसेवियों से आह्वान किया कि वे स्कूलों और ग्राम स्तर पर कार्यशालाएँ आयोजित करें, ताकि हर बच्चा और अभिभावक इस अभिशाप के दुष्प्रभावों को समझ सके।

Awadhesh Pratap Singh University Rewa Seminar-युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही बाल विवाह जैसी कुरीति को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है।

सामूहिक शपथ-एकजुटता का प्रतीक-

Collective Oath-A Symbol of Unity

संगोष्ठी के अंत में सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और उपस्थित छात्र-छात्राओं को बाल विवाह न करने, न कराने और न होने देने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। इस शपथ ने कार्यक्रम के उद्देश्य को चरितार्थ किया और सभी में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। इस दृढ़ संकल्प के साथ आयोजन संपन्न हुआ कि हम सब मिलकर अपने समाज को बाल विवाह मुक्त बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।

उपस्थिति एवं सहभागिता-Attendance and Participation

इस अवसर पर समाज कार्य अध्ययन केन्द्र के प्राध्यापकगण-डॉ. शशांक पाण्डेय, डॉ. प्रीतम सिंह, डॉ. सुनीत कुमार द्विवेदी, डॉ. शालिनी शर्मा, डॉ.दीपमाला तिवारी,तथा गैर-शैक्षणिक स्टाफ श्री आशीष कुमार पाण्डेय और श्री रामकिशोर साकेत सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का संचालन और व्यवस्थन विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग ने सफलतापूर्वक किया।

निष्कर्ष-Conclusion-बाल विवाह उन्मूलन केवल कानूनी प्रावधानों से संभव नहीं है, इसके लिए सामूहिक सामाजिक दबाव और जनचेतना आवश्यक है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के समाज कार्य अध्ययन केन्द्र में आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही बाल विवाह जैसी कुरीति को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है। प्रो. अखिलेश शुक्ल और प्रो. महानंद द्विवेदी जैसे विद्वानों के मार्गदर्शन ने शिक्षकों और छात्रों को एक नई दिशा दी। सामूहिक शपथ के साथ यह कार्यक्रम एक मील का पत्थर साबित हुआ। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में इस तरह के प्रयास और तीव्र होंगे और भारत सचमुच बाल विवाह मुक्त देश बन जाएगा।आयोजन की जानकारी प्रो. शशांक पाण्डेय, समाज कार्य विभाग, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा ने दी।
Exit mobile version