शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) के खिलाफ यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) के गंभीर आरोपों में नई कड़ी जुड़ गई है। प्रयागराज (Prayagraj) पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़ित नाबालिग बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आ गई है, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।झूंसी थाना (Jhunsi Police Station) के तहत POCSO मामले में बुधवार को दो नाबालिग बटुकों का मेडिकल टेस्ट सरकारी अस्पताल में दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराया गया। रिपोर्ट बंद लिफाफे में गुरुवार को जांच अधिकारी को सौंपी गई और इसे शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है, लेकिन किसने, कब और कहां यह किया – यह जांच का विषय है। पूरी जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट होगी। थाना प्रभारी महेश मिश्र ने बताया कि मामला कोर्ट में है, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती।
शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) ने बुधवार को दावा किया कि उनके पास मजबूत सबूत हैं और मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है, जिससे जल्द न्याय मिलेगा। एक पीड़ित बटुक ने पहली बार मीडिया के सामने आकर आज तक को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह अध्ययन के लिए गया था, तभी उसका शोषण किया गया। उसके साथ अन्य बच्चे भी थे। उसने नाम लिया अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) और उनके शिष्य मुकुंदानंद (Mukundanand) का।
टुक ने बताया कि प्रकाश और अरविंद जैसे शिष्य बच्चों को बाहर से लाते थे, और माघ मेला में 16 जनवरी को भी शोषण हुआ।मामले की शुरुआत माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद से हुई। 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी, जिसमें माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए। पुलिस कार्रवाई न करने पर 8 फरवरी को स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया, 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए और उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए।
शंकराचार्य ने 24 फरवरी को प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) पर साजिश का आरोप लगाया और इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिका दायर की। उन्होंने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है। जांच जारी है और मामला संवेदनशील होने के कारण दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि जांच से ही होगी।
