रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में अपनी विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर आशा व आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। ‘सीटू’ (CITU) संगठन के बैनर तले एकजुट हुईं सैकड़ों की संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और जमकर हल्ला बोला। कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी आवाज बुलंद करने के बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सूबे के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करने की मांग की।
आशा कार्यकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि शासन द्वारा उनसे चौबीसों घंटे बेहद कठिन और जिम्मेदारी वाले कार्य लिए जाते हैं। बच्चे के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक का पूरा लेखा-जोखा रखने के साथ-साथ आयुष्मान कार्ड बनाने जैसे तमाम विभागीय ऑनलाइन काम भी उन्हीं के भरोसे हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक उन्हें नियमित शासकीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का दर्जा नहीं दिया गया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे पूरी निष्ठा से स्वास्थ्य सेवाओं को जमीन पर उतारती हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल उपेक्षा ही मिलती है।
नियमितीकरण के अलावा सबसे बड़ी समस्या मानदेय के भुगतान को लेकर सामने आई है। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के स्पष्ट आदेश हैं कि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक सभी आशा कार्यकर्ताओं का भुगतान हो जाना चाहिए। इसके विपरीत, रीवा में पिछले तीन से चार महीने से उनका मानदेय अटका हुआ है। हद तो तब हो जाती है जब महीनों के इंतजार के बाद मिलने वाला यह मानदेय भी अनुचित कटौती के साथ आधा-अधूरा दिया जाता है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अपनी मांगों को लेकर मुखर हुईं कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में कई प्रमुख शर्तें रखी हैं। उनकी मुख्य मांग है कि जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम वेतन ₹26,000 मासिक किया जाए। इसके साथ ही पूर्व में घोषित राशि का एरियर सहित भुगतान हो और प्रतिवर्ष ₹1,000 की वेतन वृद्धि का आदेश लागू किया जाए। वर्तमान में दिए जा रहे ऑनलाइन कार्यों का विरोध करते हुए उन्होंने मांग की कि इसके लिए शासन उन्हें 5G मोबाइल और पर्याप्त इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराए, क्योंकि बिना संसाधनों के उनसे जबरन ऑपरेटरों जैसा काम लिया जा रहा है।
इस पूरे मामले और हंगामे पर संज्ञान लेते हुए मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी ने आशा कार्यकर्ताओं की बात सुनी और उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारी ने माना कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली इन कार्यकर्ताओं का मानदेय समय पर न मिलना बेहद गंभीर और आपत्तिजनक विषय है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारियों (सीएमएचओ) को तलब किया जाएगा और पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में हर महीने की 5 तारीख से पहले इन सभी का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

